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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
डॉ. रमाकान्त शर्मा इधर के उन समीक्षकों में से प्रमुख हैं जिन्होंने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और डॉ. रामविलास शर्मा की आलोचना को सहज समकालीनता के मिजाज से विकसित किया है। । प्रस्तुत पुस्तक महत्त्वपूर्ण इसलिए है कि यहाँ कविता के नये प्रतिमानों से गहरी असहमति जता कर कुछ ऐसे प्रतिमानों तथा काव्य सिद्धान्तों का विनम्र…
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₹80.00 Original price was: ₹80.00.₹64.00Current price is: ₹64.00.
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
समाज भाषा विज्ञान अपेक्षाकृत अर्वाचीन ज्ञानशाखा है। इसका अध्ययन अभी अपने प्रथम चरण में ही है। समाज भाषा विज्ञान की दृष्टि में भाषा केवल ध्वनियों, पदों और वाक्यों का समूह मात्र नहीं है। यह एक सजीव संप्रेषण माध्यम है, और समाज के सम्पूर्ण चिन्तन प्रवाह और आन्तरिक-बाह्य व्यवस्था को अभिव्यक्त करती है। प्रस्तुत पुस्तक भाषा…
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
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₹275.00 Original price was: ₹275.00.₹220.00Current price is: ₹220.00.
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
पाश्चात्य काव्यशास्त्र : परम्परा और सिद्धान्त पाश्चात्य साहित्यिक चिंतन की परम्परा और प्रमुख सिद्धान्तों का सरल एवं सुव्यवस्थित परिचय प्रस्तुत करती है। प्लेटो से लेकर आधुनिक आलोचकों तक के विचारों को ऐतिहासिक क्रम में समझाते हुए यह पुस्तक काव्य, कला और साहित्य की विभिन्न धाराओं को स्पष्ट करती है। विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए यह एक उपयोगी और विश्वसनीय मार्गदर्शिका है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.
Adhunik Hindi Kavita Ke Vaicharik Evam Shilpagat Ayam आधुनिक हिंदी कविता के वैचारिक और शिल्पगत आयामों का विश्लेषण करती यह कृति, डॉ. अनुराधा गर्ग द्वारा प्रस्तुत है। भारतेन्दु युग से लेकर आज तक की कविता पर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के प्रभावों का गहन अध्ययन, जिसमें डार्विन, मार्क्स, सार्न जैसे विचारकों की मान्यताओं और मिथक, फैंटेसी, बिम्ब, प्रतीक जैसे शैल्पिक उपादानों के उपयोग का विवेचन किया गया है।
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₹50.00 – ₹135.00Price range: ₹50.00 through ₹135.00
Hindi Katha Sahitya Ka Itihas हिन्दी कहानी के एक शताब्दी के हलचल भरे, किन्तु अकादमिक दृष्टि से समृद्ध इतिहास का मूल्यांकन। हेतु भारद्वाज की यह कृति गुलेरी की ‘उसने कहा था’ से लेकर प्रेमचन्द, प्रसाद, जैनेन्द्र, और स्वातंत्र्योत्तर काल के कहानीकारों तक की विकास यात्रा को निर्लिप्त भाव से समझने का प्रयास करती है, हिन्दी कहानी के विभिन्न आंदोलनों और प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करती है।
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
डॉ. हेमेंद्र कुमार पानेरी द्वारा रचित समालोचनात्मक कृति ‘डॉ. आलमशाह खान का कथा साहित्य एवं समकालीन सामाजिक यथार्थ’ हिन्दी के प्रतिष्ठित कथाकार डॉ. आलमशाह खान के सम्पूर्ण कृतित्व का गहन व वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक शोषक और शोषित के बीच की खाई को पाटने वाली उनकी कहानियों, आंचलिक प्रभाव से युक्त अनूठी अभिव्यक्ति-शैली, तथा उपेक्षित, प्रताड़ित व दलित वर्ग के यथार्थवादी शब्दचित्रों का प्रामाणिक विवेचन करती है।
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि पी.बी. शैली कवियों को संसार का अनभिज्ञात विधायक कहते हैं। उन्हीं के मित्र हैं विलियम वर्डसवर्थ जिनके अनुसार कवि असाधारण संवेदना के स्वामी होते हैं तथा उनमें नैसर्गिक प्रतिभा होती है कि वे कर्कश में संगीत की तथा असुन्दर में सुन्दर की स्थापना कर सकें। कवि साक्षी होते हैं भूत और वर्तमान के, तथा सृजक होते हैं भविष्य के। वे अंधेरे में प्रकाश के सम्वाहक होते हैं। इसीलिए भौतिकवादी तथा उपयोगितावादी संसार में कवियों की सार्थकता और बढ़ जाती है। अनुवाद संसार के विभिन्न भागों में, विभिन्न भाषाओं में लिखे साहित्य को जोड़ने के लिए सेतु का कार्य करता है। ‘लाइलक और कमल’ इसी कार्य को करने का सार्थक प्रयास है।
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
21वीं सदी हिन्दी साहित्य की दुनिया में अनेक विमर्शों पर लगातार चिंतन और मनन हो रहा है। अनेक कहानियों, उपन्यासों कविताओं में जो जीवन के व्यापक अनुभवों को साहित्य में निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं इससे साहित्य में अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई। वर्तमान में प्रमुख विमर्श हैं स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, थर्ड…
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
ख़यालों का आईना’ जीवन, समाज और रिश्तों के एहसासों को समेटे कविताओं, नज़्मों और शेरों का एक दिलकश संग्रह है। आम बोलचाल की सहज हिन्दी-उर्दू में रची गई ये कविताएँ जीवन के संघर्षों, कोरोना काल की चुनौतियों और अपनों के संबल को सीधे दिल तक पहुँचाती हैं।
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
हेतु भारद्वाज द्वारा रचित संस्मरणों का एक सहज और आत्मीय संकलन। आत्मरति और दिखावे से दूर, लेखक ने जीवन के विविध मोड़ों और अनुभवों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है, ताकि वे हर पाठक के अपने अनुभव का हिस्सा बन सकें।
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NEP 2020Sem-6
₹180.00 Original price was: ₹180.00.₹144.00Current price is: ₹144.00.
प्रवासी हिन्दी साहित्य : रचना-प्रक्रिया एवं समीक्षा वैश्विक स्तर पर फैले भारतीय समुदाय के जीवन-अनुभवों, सांस्कृतिक चेतना, संघर्ष और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक प्रामाणिक एवं शोधपरक दस्तावेज़ है। यह पुस्तक गिरमिटिया काल से लेकर आधुनिक युग तक के प्रवासी भारतीयों के विस्थापन, पहचान के संकट, द्वंद्व और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की जिजीविषा को…
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
गद्य को कवियों (रचनाकार) की कसौटी कहा जाता है और निबन्ध को गद्य की कसौटी। यद्यपि परीक्षा में परीक्षार्थी निबन्ध न लिखकर लेख लिखता है, परन्तु कहा इसे निबन्ध ही जाता है। आज किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए हिन्दी भाषा एवं साहित्य का ज्ञान आवश्यक होता जा रहा है। इसमें निबन्ध की भूमिका…
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
मोहन राकेश अपने पात्रों के माध्यम से जिन्दगी के यथार्थ की बेतरतीब तसवीर प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्र, चाहे मिथकीय हों या आधुनिक, अपनी अर्थवत्ता में पूर्णतः समकालीन हैं। जीवन की त्रासदियों, अस्तित्व संकट तथा मूल्य-संक्रमण की स्थितियों से गुजरते हुए ये पात्र अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं के नीचे दबे बिखर-बिखर जाते हैं। तथापि उनकी संवेदनशीलता…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
शम्भुनाथ ने मिश्रबन्धु के आलोचक व्यक्त्तित्व का पुनर्मूल्यांकन बड़ी निष्ठा, तत्परता और सहानुभूतिपूर्वक किया है। उन्होंने मिश्रबन्धु की इतिहासदृष्टि पर भी नए सिरे से विचार करते हुए परवर्ती इतिहासग्रन्थों पर उसके प्रभाव को भी रेखांकित किया है और इतिहासलेखक आलोचक मिश्रबन्धु की छवि को नयी दीप्ति देने की कोशिश की है। शम्भुनाथ ने निश्चय ही…