Shambhunath Tiwari

शम्भुनाथ तिवारी हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, कवि, समीक्षक एवं शोधकर्ता हैं। उनका जन्म 11 जुलाई 1962 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के ग्राम गोहुअना में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक तथा जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान एवं स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त की। इसके पश्चात यू.जी.सी. रिसर्च फेलोशिप (जे.आर.एफ./नेट) के अंतर्गत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से प्रो. नामवर सिंह के निर्देशन में एम.फिल. एवं पीएच.डी. शोधकार्य सम्पन्न किया।

साहित्य, भाषा एवं आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। हिन्दी की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनके शोधपरक लेख, समीक्षाएँ, व्यंग्य, कविताएँ, गीत एवं ग़ज़लें प्रकाशित होती रही हैं। उर्दू साहित्य की पत्रिकाओं में भी उनकी ग़ज़लों को विशेष सराहना मिली है। बाल साहित्य के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उनके बालगीत देश की अनेक प्रमुख बाल पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

हिन्दी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन में उनकी गहरी रुचि रही है। हिन्दी भाषा पर आधारित उनके शोधपरक लेखों की श्रृंखला ‘भाषा परिष्कार’ विशेष रूप से चर्चित रही। साहित्य, भाषा और संस्कृति के विविध पक्षों पर उनका लेखन गंभीर अध्ययन और सृजनात्मक दृष्टि का परिचायक है।

उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें हिन्दी अकादमी, दिल्ली के छात्र पुरस्कार सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। उनकी रचनाएँ प्रतिष्ठित साहित्यिक संकलनों एवं प्रकाशनों में शामिल की गई हैं तथा उनकी कविताएँ एवं वार्ताएँ आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से प्रसारित होती रही हैं।

हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी, संस्कृत, उर्दू और बांग्ला भाषाओं का ज्ञान रखने वाले शम्भुनाथ तिवारी ने शोध, अध्यापन एवं साहित्य सृजन के माध्यम से हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी रचनाएँ साहित्यिक संवेदना, भाषिक परिष्कार और वैचारिक गहराई का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

Books by this Author


Showing the single result

  • Sale! Mishrabandhu Aur Hindi Alochana

    Mishrabandhu Aur Hindi Alochana

    Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹400.00.

    शम्भुनाथ ने मिश्रबन्धु के आलोचक व्यक्त्तित्व का पुनर्मूल्यांकन बड़ी निष्ठा, तत्परता और सहानुभूतिपूर्वक किया है। उन्होंने मिश्रबन्धु की इतिहासदृष्टि पर भी नए सिरे से विचार करते हुए परवर्ती इतिहासग्रन्थों पर उसके प्रभाव को भी रेखांकित किया है और इतिहासलेखक आलोचक मिश्रबन्धु की छवि को नयी दीप्ति देने की कोशिश की है। शम्भुनाथ ने निश्चय ही…

Need help?