Sale!

Hindi Katha Sahitya Ka Itihas

हिंदी कथा साहित्य का इतिहास

Author(s): Hetu Bharadwaj
Language: Hindi
Pages: 128

Price range: ₹50.00 through ₹135.00

Hindi Katha Sahitya Ka Itihas हिन्दी कहानी के एक शताब्दी के हलचल भरे, किन्तु अकादमिक दृष्टि से समृद्ध इतिहास का मूल्यांकन। हेतु भारद्वाज की यह कृति गुलेरी की ‘उसने कहा था’ से लेकर प्रेमचन्द, प्रसाद, जैनेन्द्र, और स्वातंत्र्योत्तर काल के कहानीकारों तक की विकास यात्रा को निर्लिप्त भाव से समझने का प्रयास करती है, हिन्दी कहानी के विभिन्न आंदोलनों और प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करती है।

Share:
GUARANTEED SAFE CHECKOUT
  • Visa Card
  • MasterCard

हिन्दी कहानी का एक शताब्दी का इतिहास बहुत हलचल भरा, किन्तु अकादमिक दृष्टि से बहुत समृद्ध रहा है। यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि पश्चिम में जब कहानी कलात्मक और रचनात्मक शीर्ष पर पहुँच चुकी थी तब हिन्दी में कहानी लेखन परम्परा आरम्भ हुई थी। किन्तु हिन्दी कहानी के उन्मेष काल में ही गुलेरी की ‘उसने कहा था’ जैसी परिपक्व और हर दृष्टि से रचनात्मक कहानी ने जैसे हिन्दी कहानी के उज्ज्वल भविष्य की घोषणा कर दी थी। प्रेमचन्द और प्रसाद जैसी अद्भुत प्रतिभाओं ने हिन्दी कहानी को जो समृद्ध आधार प्रदान किया उस पर हिन्दी कहानी निरन्तर विकासमान होती रही।

जैनेन्द्र, अज्ञेय, यशपाल, अश्क आदि के बाद स्वातंत्र्योत्तर काल में हिन्दी कहानी में जैसे कहानीकार प्रतिभाओं का विस्फोट हुआ और कहानी हिन्दी की केन्द्रीय विधा के रूप में स्थापित हो गयी। आज भी उसे यह हैसियत प्राप्त है। इसका कारण यह भी रहा कि जीवन यथार्थ के विभिन्न आयामों को रेखांकित कर सकने की जितनी क्षमता हिन्दी कहानी ने अर्जित की उतनी अन्य किसी विधा ने नहीं।

प्रस्तुत कृति हिन्दी कहानी की हलचल भरी विकास यात्रा को निर्लिप्त भाव से समझने का प्रयास करती और हिन्दी कहानी के विभिन्न आन्दोलनों और उसकी विभिन्न प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करती है। हिन्दी कहानी की विकास यात्रा को समझने में यह कृति पाठक को स्पष्ट दृष्टि प्रदान करेगी, ऐसा हमारा विश्वास है।

Weight290 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Hindi Katha Sahitya Ka Itihas”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

Dr. Hetu Bharadwaj

डॉ. हेतु भारद्वाज का जन्म उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव रामनेर में हुआ। ग्रामीण जीवन की विपन्नता और सामाजिक विषमताओं से उनका गहरा सरोकार रहा है, जिसके कारण वे संवेदनात्मक स्तर पर ग्रामीण यथार्थ से आजीवन जुड़े रहे हैं।…

View Full Profile →
Need help?