Kalpna Morya

डॉ. कल्पना मौर्य एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं साहित्यकार हैं। वे वर्तमान में उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान (मानित विश्वविद्यालय), सरदारशहर (चूरू, राजस्थान) के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष पद पर सेवारत हैं। उन्होंने हिन्दी विषय में पीएच.डी., एम.ए., बी.एड. तथा संस्कृत शिक्षा में प्रथम श्रेणी सहित एम.लिब. व बी.लिब. की उच्च उपाधियाँ अर्जित की हैं।
अकादमिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में वे ‘विष्णु प्रभाकर के नाट्य साहित्य का अनुशीलन’, ‘21वीं सदी और साहित्य विमर्श’ तथा ‘शिक्षा संस्कृत से सशक्त होता भारत’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियों की लेखिका हैं।
इसके अतिरिक्त उनके 20 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने 20 से अधिक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता निभाई है। आकाशवाणी के छतरपुर केंद्र के ‘युवावाणी’ कार्यक्रम से उनकी पाँच कविताएँ प्रसारित हो चुकी हैं और वे साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सृजनरत हैं।

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    21St Sadi Aur Sahitya Vimarsh

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    21वीं सदी हिन्दी साहित्य की दुनिया में अनेक विमर्शों पर लगातार चिंतन और मनन हो रहा है। अनेक कहानियों, उपन्यासों कविताओं में जो जीवन के व्यापक अनुभवों को साहित्य में निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं इससे साहित्य में अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई। वर्तमान में प्रमुख विमर्श हैं स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, थर्ड…

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