डॉ. विमलेश शर्मा हिन्दी साहित्य की शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं लेखिका हैं। उनका जन्म 30 मार्च 1982 को राजस्थान के ब्यावर नगर में हुआ। उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर से हिन्दी विषय में एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने जून 2009 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) उत्तीर्ण की।
हिन्दी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन, अध्यापन, शोध एवं लेखन के क्षेत्र में उनका सक्रिय योगदान रहा है। हिन्दी कथा साहित्य, भाषा-विज्ञान तथा साहित्यिक अध्ययन उनके प्रमुख रुचि-क्षेत्र हैं। ‘कमलेश्वर के कथा साहित्य में मध्यवर्ग’ विषय पर उनका शोधकार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
डॉ. शर्मा के शोध-पत्र, लेख एवं साहित्यिक रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक एवं शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी कविताएँ राजस्थान पत्रिका तथा दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई हैं। वे साहित्यिक लेखन एवं शोध गतिविधियों से निरंतर जुड़ी रही हैं।
उनकी प्रमुख कृतियों में कमलेश्वर के कथा साहित्य में मध्यवर्ग, हिन्दी लघु व्याकरण कोश, हिन्दी व्याकरण माला, हिन्दी भाषा एवं साहित्य का अध्ययन इतिहास, ऋणानुबंध, कथा-कौस्तुभ तथा हिन्दी की दलित कविता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
शोध, लेखन एवं अध्यापन के माध्यम से डॉ. विमलेश शर्मा ने हिन्दी साहित्य के अध्ययन और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी कृतियाँ विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं हिन्दी साहित्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
₹140.00Original price was: ₹140.00.₹112.00Current price is: ₹112.00.
यह पुस्तक महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के सेमेस्टर 4 (हिन्दी) Skill Paper के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार की गई यह पुस्तक विद्यार्थियों को सरल भाषा में स्पष्ट, संगठित एवं परीक्षा-केंद्रित अध्ययन सामग्री प्रदान करती है।
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.
Kamleshwar ke Katha Sahitya mein madhyavarg कमलेश्वर, स्वातंत्र्योत्तर काल के संवेदनशील रचनाकार, ने नई कहानी आंदोलन के प्रणेता के रूप में अभूतपूर्व कार्य किया। डॉ. विमलेश शर्मा की यह कृति कमलेश्वर के समस्त कथा-साहित्य का मध्यवर्गीय जीवन के केंद्र में रखकर विश्लेषण करती है, जिसमें भारतीय मध्यवर्ग के संघर्षों, विद्रूपों और बदलते वक्त की विडम्बनाओं का सजीव चित्रण मिलता है।