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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय समाज से सम्बन्धित प्रमुख समस्याओं और मुद्दों की समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विवेचना की गई है। सर्वप्रथम निर्धनता, जाति की असमानता और लिंग असमानताओं की समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। भारत में धार्मिक, नृजाति एवं क्षेत्रीय असामंजस्यताओं के अर्थ, कारण, दुष्परिणाम, निवारण के उपायों एवं सुझावों की विवेचना की गई है।…
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रेमकृष्ण शर्मा द्वारा रचित कहानी-संग्रह ‘सड़क किनारे की कहानियाँ’ प्रेमचंद की प्रगतिशील यथार्थवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आमजन, शोषितों और वंचितों के जीवन-संघर्ष को स्वर देता है। पेशे से अधिवक्ता और जनवादी कार्यकर्ता लेखक ने ‘सफाई कर्मी रैना’, ‘मरखू’ और ‘बीच सड़क पर’ जैसी कहानियों के जरिए सड़क किनारे बिखरे अभावग्रस्त पात्रों के अस्तित्व की लड़ाई और सामाजिक विद्रूपताओं का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है।
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₹600.00 Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
प्रो. सुनील कुमार शर्मा द्वारा रचित शोध-ग्रंथ ‘अजमेर जिले में अनुसूचित जाति जनसंख्या का सामाजिक-आर्थिक विकास’ राजस्थान के अजमेर जिले में अनुसूचित जातियों की वास्तविक स्थिति का प्रामाणिक व तथ्यात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। पुस्तक में विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के धरातलीय प्रभाव, बिचौलियों की भूमिका, तथा रोज़गार व जीवन-स्तर से जुड़े जमीनी संघर्षों का सारणियों व सांख्यिकीय आँकड़ों के माध्यम से गहन विश्लेषण किया गया है।
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
मनमोहन सहगल द्वारा रचित एक संवेदनशील लघु उपन्यास, जो भारतीय समाज में हाशिए पर धकेले गए किन्नर समुदाय की मूक पीड़ा और अंतर्द्वंद्व को उजागर करता है। यह पुस्तक पारिवारिक अलगाव, सामाजिक उपेक्षा और संस्थागत विमुखता को रेखांकित करते हुए समाज को संवेदनशीलता और समावेशन का संदेश देती है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
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₹995.00 Original price was: ₹995.00.₹796.00Current price is: ₹796.00.
भारत में सामाजिक परिवर्तन’ शीर्षक कृति सामाजिक विज्ञानों के उन शोधकर्ताओं एवं रुचिशील पाठकों के लिए लिखी गई है जो सामाजिक परिवर्तन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं से अवगत होना चाहते हैं। विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के पाठकों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए इस कृति में तीन खण्ड हैं। प्रथम खण्ड में सामाजिक परिवर्तन की…
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
वही राष्ट्र और जाति प्रगति के शिखरों का स्पर्श करते हैं जो अपनी जमीनी वास्तविकताओं को चिन्ता के केन्द्र में रखते हैं। किसी प्रजातन्त्र की नींव तभी मजबूत हो सकती है जब तृणमूल स्तर पर उसकी सक्रियता पूर्ण निष्ठा के साथ हो तथा इस सक्रियता में दूर-दराज फैले अंचलों की महिलाओं की भी भागीदारी हो।…
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹90.00Current price is: ₹90.00.
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
राजनीति आज के वातावरण में पूरी तरह घुल-मिल गयी है तथा जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जो राजनीति से अछूता हो। सामंती तथा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यही तो अन्तर है कि सामंतवाद में आमजन की कोई महत्ता नहीं है जबकि लोकतंत्र में हर व्यक्ति उसकी राजनीति का का अपरिहार्य अंग है। इसलिए लोकतंत्र ने…
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
आज के विश्व मानव समाज में महिला को मानवीयोचित न्याय नहीं मिल रहा है। पुरुष की अहंकारी मनोवृत्ति ने नारी को सदा पीछे धकेला है किन्तु आज के भौतिक अर्हताओं से चमत्कृत रूप पहले इस संसार में पुरुष नारी के सहयोग के बिना सुख व शान्ति व सन्तोष का जीवन नहीं जी सकता है। अब…
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
समाज समस्या है समाधान नहीं? यह एक चिरंतन प्रश्न है। किन्तु इसके उत्तर में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि समाज का मूल चरित्र तो समस्याधर्मी है। अपने आदिम रूप से लेकर आज के उन्नत रूप तक समाज की समस्याओं में निरन्तर इजाफा ही हुआ है। आज के उन्नत समाज में अपराध के बड़े सूक्ष्म…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.
Bhartiya Samaj me Naree वर्तमान सदी में उभरे नारी विमर्श में ‘भारतीय समाज में नारी’ एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। वीरेंद्र प्रकाश शर्मा द्वारा लिखित यह कृति नारी की अस्मिता की रक्षा के लिए किए जा रहे औपचारिक प्रयासों, नारी समस्याओं और उनके निराकरण के उपायों का विश्लेषण करती है। यह लिंग और जेंडर अवधारणाओं, समानता, न्याय, और संवैधानिक प्रावधानों की विशद् व्याख्या करती है, जो पाठ्यक्रमों के लिए विश्वसनीय सामग्री है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.
Mahila Sashaktikaran प्रियंका माथुर की यह पुस्तक पुरुष प्रधान समाजों में नारी को मिली द्वितीय श्रेणी की नागरिकता पर केंद्रित है। यह नारी सशक्तिकरण के जैविक और मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, विकास प्रक्रिया, सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों, तथा संवैधानिक प्रावधानों की विशद् व्याख्या करती है। यह कृति साइमन द बोउवा और कैट मिलैट जैसी नारीवादी चिन्तकों के प्रभाव को दर्शाती है, जो नारी-जागरण और सशक्तिकरण के आंदोलन की पैरवी करती है।
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.
Nari Tum Kya ? नारी जीवन भर पुरुष के लिए चुनौती रही है, फिर भी लेखक के मन में नारी के प्रति गहरा सम्मान भाव रहा है। एम. ए. अंसारी की यह कृति नारी को भोग वस्तु नहीं, बल्कि पूज्य आद्याशक्ति के रूप में देखती है। यह पुरुष की उस भावना का खंडन करती है जो नारी के बाह्य-सौन्दर्य पर आसक्त रहती है, और नारी जीवन को उन्नत व दृष्टि सम्पन्न बनाने का दायित्व पुरुष का ही मानती है।
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
Nari Jeevan : Sulagte prashn नारी का जीवन सुलगते प्रश्नों का पर्याय है। एम. ए. अंसारी की यह कृति पितृसत्तात्मक समाजों में नारी की दयनीय स्थिति और उसके शोषण पर अंगुली उठाती है। यह नारी मुक्ति की तीव्र स्फुरण को रेखांकित करती है, जो नारी को पुरुष के बनाए विधान की सीमाओं को लांघने का प्रयास करने लगी है, और नारी जीवन के भयावह अतीत तथा संघर्षशील वर्तमान का समग्र चित्र प्रस्तुत करती है।
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
Bal Apradh बालक देश का भावी कर्णधार है, परन्तु बाल अपराध एक विकट और गंभीर समस्या बनी हुई है। डॉ. बृन्दा सिंह की यह पुस्तक बाल अपराध के कारणों, परिणामों और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहन प्रकाश डालती है। यह बालकों की परवरिश और शिक्षा-दीक्षा पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जो समाज सुधारकों और गृहिणियों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.
Sahriya Janjati : Sahitya Evam Sanskriti वर्तमान में समाज के सभी वर्गों की जीवन पद्धति में तेजी से परिवर्तन हो रहा है, किन्तु सहरिया जनजाति आज भी अपनी परम्परागत दयनीय जीवन जी रही है। डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की यह साहसपूर्ण कृति सहरियाओं के लोक साहित्य, संस्कृति और कलापरक पक्षों का अध्ययन प्रस्तुत करती है, जो इस अल्पज्ञात जनजाति के जीवन की बहुआयामी झांकी दिखाती है।