Prem Krishna Sharma

प्रेम कृष्ण शर्मा देश के शीर्षस्थ श्रम अधिवक्ता, मानवाधिकार चिंतक एवं बहुआयामी साहित्यकार हैं। उन्होंने उच्च व उच्चतम न्यायालय में मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों की सशक्त पैरवी की है तथा सीटू (CITU) के प्रदेश महासचिव और पी.यू.सी.एल. (PUCL) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे चीन, पेरिस (विश्व मानवाधिकार सम्मेलन) और ब्रिटेन (विश्व हिन्दी सम्मेलन) में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

जनवादी लेखक संघ से संबद्ध श्री शर्मा ने कविता, आलोचना, उपन्यास व यात्रा-वृत्तांत की अनेक विधाओं में लिखा है। भ्रमरगीत, बिहारी अनुशीलन, यत्र नार्यस्तु…, अबके आया नहीं कबीरा तथा Travelling Impressions उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं।

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    प्रेमकृष्ण शर्मा द्वारा रचित कहानी-संग्रह ‘सड़क किनारे की कहानियाँ’ प्रेमचंद की प्रगतिशील यथार्थवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आमजन, शोषितों और वंचितों के जीवन-संघर्ष को स्वर देता है। पेशे से अधिवक्ता और जनवादी कार्यकर्ता लेखक ने ‘सफाई कर्मी रैना’, ‘मरखू’ और ‘बीच सड़क पर’ जैसी कहानियों के जरिए सड़क किनारे बिखरे अभावग्रस्त पात्रों के अस्तित्व की लड़ाई और सामाजिक विद्रूपताओं का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है।

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