₹400.00Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
Line, Shade and Shadow is a practical and comprehensive guide to the fundamentals of drawing, shading, figure drawing and visual composition. Designed for fine arts and fashion designing students, the book explains essential drawing techniques in a simple and practical manner. It covers the study of line, light and shadow, anatomy, still life, human figure,…
₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
गांधीजी ने भारत के हर बच्चे के लिए अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का सपना देखा था तथा उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान ‘बुनियादी शिक्षा’ का दर्शन स्थापित कर इस दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया था। लेकिन यह विडम्बना ही कही जाएगी कि इक्कीसवीं सदी के आरम्भ में भारत सरकार शिक्षा को मौलिक अधिकार के…
₹400.00Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
राजनीति आज के वातावरण में पूरी तरह घुल-मिल गयी है तथा जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जो राजनीति से अछूता हो। सामंती तथा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यही तो अन्तर है कि सामंतवाद में आमजन की कोई महत्ता नहीं है जबकि लोकतंत्र में हर व्यक्ति उसकी राजनीति का का अपरिहार्य अंग है। इसलिए लोकतंत्र ने…
₹400.00Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
उन्नीसवीं शताब्दी में भारत के पुनर्जागरण आन्दोलन में जिन महानुभावों का अप्रतिम योगदान रहा, उनमें राजा राममोहन राय तथा दयानन्द सरस्वती का योगदान अग्रणी है, क्योंकि इन दोनों ही महापुरुषों ने रूढ़ियों, अन्ध-विश्वासों, कुरीतियों, जड़-परम्पराओं के पंक में डूबे भारतीय समाज को जागरण का नया मंत्र दिया। राजा राममोहन राय पूर्णकालिक समाज-सुधारक थे तथा उन्होंने…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
यह व्यंग्य संग्रह जीवन की छोटी-बड़ी सच्चाइयों को जीवंत रूप में सामने लाता है। भाषा के नए तेवर के साथ व्यंग्यकार असंगत मूल्यों को उद्घाटित करता है। रोचकता इन व्यंग्य रचनाओं का प्राण हैं। विसंगतियों और विद्रूपताओं की चिंदी-चिंदी कर रचनाकार जवाबदेह सवाल खड़े करता है और वास्तविकता से रू-ब-रू कराता है। इनमें व्यंग्य की…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
प्राचीन भारत में जिन दार्शनिक सिद्धान्तों का प्रणयन हुआ, उनमें सांख्य प्रमुख दर्शन के रूप में प्रतिष्ठित है। द्वैत मत का प्रतिपादक सांख्य दर्शन प्रकृति और पुरुष दोनों को मूल तत्त्व मानता है। सत्कार्यवाद के समर्थक सांख्य दर्शन के अनुसार कार्य अपने कारण में अव्यक्त रूप से विद्यमान रहता है। सांख्य दर्शन के प्रवर्तक महर्षि…
₹600.00Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
वैदिककालीन अर्द्ध-नारीश्वर की अवधारणा से पोषित नारी की गौरवशालिनी परम्परा में घोषा, अपाला, सूर्या और मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ थीं। तो मध्यकाल में भारत के राजनीतिक पटल पर अहिल्याबाई, रज़िया सुल्तान या लक्ष्मीबाई जैसी जांबाज़ वीरांगनाएँ उदित हुईं। धार्मिक परिदृश्य पर भी लल्लेश्वरी, आण्डाल या मीरां जैसे हिमालयी व्यक्तित्व सम्पन्न साधिकाओं ने इस देश में नव- जागरण…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
मनुष्य प्राचीनकाल से ही सागरों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिये प्रयासरत रहा है। प्रारम्भिक काल में वैज्ञानिक प्रगति कम होने के कारण सागरों के जैविक परिवेश की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों के विकास से हम सागरों के काफी समीप आ गये…
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
आज के विश्व मानव समाज में महिला को मानवीयोचित न्याय नहीं मिल रहा है। पुरुष की अहंकारी मनोवृत्ति ने नारी को सदा पीछे धकेला है किन्तु आज के भौतिक अर्हताओं से चमत्कृत रूप पहले इस संसार में पुरुष नारी के सहयोग के बिना सुख व शान्ति व सन्तोष का जीवन नहीं जी सकता है। अब…
₹450.00Original price was: ₹450.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
प्रबन्ध एक गहन और गूढ़ विषय है। इसकी सम्पूर्ण जानकारी और इसे व्यावहारिक रूप प्रदान करने की प्रबन्धकीय क्षमता तभी विकसित हो सकती है जबकि प्रबन्ध-वर्ग इसे सही परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करें; इसकी प्रकृति, क्षेत्र और सीमाओं से पूरी तरह से परिचित हों; आधुनिकतम प्रबन्धकीय विचारधाराओं का ज्ञाता हो, सभी प्रबन्धकीय कार्यों को सुनियोजित ढंग…
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
श्री भट्ट जी ने संविधान के हर पहलू पर अत्यन्त गूढ़ अध्ययन करने के पश्चात् एक विहंगम दृष्टि डाली है तथा पाठकों को संविधान की रचना से अन्तिम संशोधन तक समझाने के लिए प्राचीन ऋषि-मुनियों एवं मनीषियों द्वारा लिखित स्मृतियों का विवेचन करते हुए तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला देते हुए पूरे भारतीय इतिहास…
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मेरे प्रिय लेखक हिन्दी व्यंग्य में दो तरह के लोग व्यंग्य लिख रहे हैं-एक वे, जिन्हें व्यंग्य की व्याकरण तथा सौन्दर्यशास्त्र की समझ है और दूसरे वे, जिन्हें इस चीज की कोई समझ नहीं। इसी दूसरे वर्ग में आप एक उपवर्ग उन लोगों का भी कर सकते हैं, जिन्हें खुद तो समझ है नहीं पर…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
संवेदनहीनता से जड़ होती जिन्दगी की असंगत धारणाओं को कहानियों में पिरोने का एक सफल प्रयास है यह संकलन। सभी कहानियाँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पा चुकी हैं। भाषा में प्रवाह होने से पठनीयता का दायरा बढ़ा है। लेखिका का अनुभव क्षेत्र बड़ा होने से कहानियों का कथ्य भी नयेपन के साथ आया…
₹800.00Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
आज प्रेस कानून ‘मीडिया कानून’ का रूप ले चुका है। मीडिया कानून का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक एवं प्रभावी है। उल्लेखनीय है कि भारत में मीडिया कानून (प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया) संख्या में कम होते हुए भी अपने प्रभाव-क्षेत्र में व्यापक हैं, इसलिए इनकी जानकारी न केवल मीडियाकर्मी के लिए बल्कि आम जनता के लिए…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
प्रस्तुत पुस्तक ‘सचित्र पर्यावरण विश्वकोश’ आज के मानव जगत की पर्यावरण के बारे में जिज्ञासाओं का सरल एवं प्रामाणिक समाधान प्रस्तुत करती है जिसमें वैश्विक पर्यावरण के सभी घटकों की प्रामाणिक चित्रों, आरेखों एवं आंकड़ों के साथ विस्तृत विवेचना की गई है। पुस्तक में सौर मण्डल के विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्र ग्रहों, पृथ्वी, चन्द्रमा आदि…
₹600.00Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
वैज्ञानिक शोधों, आविष्कारों एवं औद्योगिक क्रान्ति के कारण आज उपभोग वस्तुओं एवं सेवाओं की सूची में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नित्य नयी- नयी चीजों का आविष्कार हो रहा है। इसके साथ हीं उपभोक्ता का शोषण भी बढ़ता जा रहा है। निर्माता/विक्रेता द्वारा अधिक धन कमाने के लालच ने मानवता की सारी हदें तोड़ दी…
₹300.00Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
समाज समस्या है समाधान नहीं? यह एक चिरंतन प्रश्न है। किन्तु इसके उत्तर में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि समाज का मूल चरित्र तो समस्याधर्मी है। अपने आदिम रूप से लेकर आज के उन्नत रूप तक समाज की समस्याओं में निरन्तर इजाफा ही हुआ है। आज के उन्नत समाज में अपराध के बड़े सूक्ष्म…