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Hindi Kavita Me Nari Chetna Ka Vikas

हिंदी कविता में नारी चेतना का विकास

Author(s): Anita Nayar
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 344
Published Year: 2014
ISBN: 978-81-7056-599-4

Original price was: ₹600.00.Current price is: ₹480.00.

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वैदिककालीन अर्द्ध-नारीश्वर की अवधारणा से पोषित नारी की गौरवशालिनी परम्परा में घोषा, अपाला, सूर्या और मंत्रदृष्टा ऋषिकाएँ थीं। तो मध्यकाल में भारत के राजनीतिक पटल पर अहिल्याबाई, रज़िया सुल्तान या लक्ष्मीबाई जैसी जांबाज़ वीरांगनाएँ उदित हुईं। धार्मिक परिदृश्य पर भी लल्लेश्वरी, आण्डाल या मीरां जैसे हिमालयी व्यक्तित्व सम्पन्न साधिकाओं ने इस देश में नव- जागरण के बाद स्थितियों को बदलने में योगदान दिया। आजादी की लड़ाई में स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर संघर्षरत रहीं। इसी स्थिति का एक दूसरा पक्ष भी है- ‘स्त्री स्वातंत्रयम् न अर्हति’ कहकर उसके अस्तित्व को ही नकारने की हर सम्भव कोशिश की जा रही थी, उसे ‘असूर्यपश्या’ बना दिया गया था, यानी जिस पर, पर-पुरुष या सूर्य की नज़र भी न पड़ सके। सात- तालों में बन्द स्त्री की ऐसी चर्चाएँ आतंकित करने वाली थीं। इतिहास-पुराण की यह द्विमुखी दृष्टि दुविधा में डाल देती है। साहित्य के माध्यम से इसी सच को ढूँढ़ने का प्रयास है, यह पुस्तक।
अपनी इच्छा से श्वास तक न लेने वाली पददलित नारी ने एक जीवन्त प्राणी की तरह स्वयं अपनी मेधा का प्रयोग करते हुए तटस्थता की नीति का परित्याग कर, न केवल सोचना-विचारना आरम्भ किया, बल्कि प्रगतिशीलता को अपने जीवन में ढालने की जद्दोजहद भी शुरू कर दी- यहीं से नारी चेतना का सूत्रपात हुआ। इतना अवश्य ध्यान रखना है कि नारी चेतना का अर्थ विकृत न होने पाए, किसी की होड़ में अपने सहज स्वभाव को तिलांजलि देकर नारी परुषता न ओढ़ ले। इसी तरह के नारी जीवन विषयक ज्वलंत प्रश्नों से डॉ. अनीता नायर की यह कृति सार्थक संवाद करती है।

Weight495 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm

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