Upbhokta Ka Arthashastra Evam Upbhokta Sanrakshan
उपभोक्ता का अर्थशास्त्र एवं उपभोक्ता संरक्षण
Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
You Save 20%
In stock
वैज्ञानिक शोधों, आविष्कारों एवं औद्योगिक क्रान्ति के कारण आज उपभोग वस्तुओं एवं सेवाओं की सूची में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नित्य नयी- नयी चीजों का आविष्कार हो रहा है। इसके साथ हीं उपभोक्ता का शोषण भी बढ़ता जा रहा है। निर्माता/विक्रेता द्वारा अधिक धन कमाने के लालच ने मानवता की सारी हदें तोड़ दी हैं। उनका ध्यान वस्तुओं की उत्कृष्टता पर नहीं, अपितु वस्तुओं के प्रचार-प्रसार एवं विज्ञापनों पर अधिक होता है ताकि अधिक माल बिके और अधिक मुनाफा हो।। यहाँ तक कि खाद्य पदार्थ एवं जीवन रक्षक दवाइयाँ भी मिलावट एवं नकली माल से अछूते नहीं हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कुछ लोग जहाँ भयंकर बीमारियों, जैसे-लकवा, ड्रॉप्सी, अंधता, पीलिया, हृदय रोग, वृक्क रोग आदि के भयंकर शिकार हो जाते हैं वहीं कुछ को अपनी कीमती जान तक गँवानी पड़ जाती है। आज शुद्ध दूध, दही, घी मिलना दुर्लभ हो गया है। हल्दी, मिर्च, धनिया, जीरा जैसे “स्वास्थ्य के प्रहरी : मसाले” में भी भारी मिलावट की जाती है। इन सभी का खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है। उसे जान और माल दोनों की ही क्षति होती है।
प्रस्तुत पुस्तक में इन सब बातों पर गहन प्रकाश डाल गया है, जो उपभोक्ता को ठगे जाने से – बचने के लिए अति आवश्यक है। उपभोक्ता मंच की विस्तार से चर्चा की गई है। उपभोक्ता वस्तुएँ कहाँ से खरीदे ? अपनी समस्याओं का समाधान कैसे करे? अपना हक कैसे प्राप्त करे? कहाँ पर अपने धन का विनियोग करे ताकि अधिक लाभ के साथ धन भी सुरक्षित रहे। इन सभी के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह पुस्तक न केवल गृह विज्ञानी के लिए अपितु देश के बच्चे-बच्चे में उपभोक्ता अधिकार के बारे में चैतन्य उत्पन्न करनें में लाभदायी सिद्ध होगी।
| Weight | 560 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |














Reviews
There are no reviews yet.