Samay Kabhi Thamta Nahi
समय कभी थमता नहीं
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Samay Kabhi Thamta Nahi हेतु भारद्वाज की कहानियाँ जिन्दगी की विश्वसनीय तस्वीर प्रस्तुत करती हैं, जहाँ समय का स्पंदन पूरी शिद्दत के साथ धड़कता है। यह संग्रह ग्रामीण जीवन की विडम्बनाओं, क्रूरताओं, और बदलते वक्त की अमानवीयताओं को उभारता है, साथ ही सामाजिक बदलावों को भी रेखांकित करता है। हेतु भारद्वाज की कहानियाँ मनुष्यता और मानवीय मूल्यों की रक्षा की चिंता करती हैं।
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हेतु भारद्वाज लगभग 1960 से कहानियाँ लिख रहे हैं तथा हिन्दी कहानी के विभिन्न उतार- चढ़ावों के वे साक्षी रहे हैं। उनकी कहानियों में जिन्दगी की विश्वसनीय तस्वीर मिलती हैं क्योंकि वे जिन्दगी को रचनाकार की प्रयोगशाला मानते हैं। इसी प्रयोगशाला से उनकी कहानियाँ तपकर निकलती हैं। उनकी कहानियों में समय का स्पन्दन पूरी शिद्दत के साथ धड़कता है तथा वे समय के साथ अपनी कथादृष्टि को ताजगी प्रदान करते रहते हैं। इसलिए उनकी कहानियों में जीवन के बदलाव की अनेक पर्तें खुलती हैं जिनमें पाठक अपने परिवेश को देख सकता है। यद्यपि वे ग्रामीण जीवन की कहानियाँ उकेरने में बहुत रमते हैं पर ग्रामीण जीवन के प्रति उनकी दृष्टि भावुक न होकर यथार्थवादी है। इसलिए ग्रामीण जीवन की विडम्बनाएँ, क्रूरताएँ, विसंगतियाँ, विद्रूपताएँ और बदलते वक्त की अमानवीयताएँ उनकी कहानियों में बराबर उभरती हैं। इसी तरह वे सामाजिक जीवन में हो रहे बदलावों को कहानियों में रेखांकित करते चलते हैं। लेकिन हेतु भारद्वाज मनुष्यता और मानवीय मूल्यों की रक्षा की बेहद चिन्ता करते हैं। इसलिए उनका रचना कर्म मानवता की बेहतरी के लिए समर्पित है। इस संकलन की कहानियों में उनके पाठकों को चारों ओर की जिन्दगी के संघर्षों की झांकी मिलेगी।
| Weight | 300 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |
















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