“Bharat Ke Rasaynik Avam Krishi Vagyanik” has been added to your cart.
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स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर आधारित यह उपन्यास वर्णनात्मक यथार्थ में भावनात्मक सत्य तलाशने का एक प्रयास है। पूर्व गृह सचिव वोहरा की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में माफिया एक समानान्तर सरकार चला रहा है। भारतीय राज व्यवस्था की केन्द्रीय समस्या एक प्रभावशाली, जनतांत्रिक, पारदर्शी, संवेदनशील एवं उत्तरदायी राज्य का अवसान है। कानून निर्माताओं…
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
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₹125.00 Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
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₹600.00 Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
महाकाव्य की कथावस्तु दो प्रकार की होती है-कल्पना प्रसूत एवं परम्परा गृहीत। परम्परा गृहीत कथावस्तु के अन्तर्गत ही पुराणों से प्राप्त वस्तु भी है। संस्कृत के श्रेष्ठ आलोच्य महाकाव्य, पौराणिक विषयों के ही हैं। वस्तुतः उनमें हमारी सांस्कृतिक चेतना के समृद्ध स्वरूप की धरोहर भी सुरक्षित है, तभी तो श्रेष्ठ महाकाव्यकार भी पौराणिक आख्यानों को…
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आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानन्द सरस्वती अग्रगण्य हैं। स्वामीजी ने अपने समय की नब्ज को पहचानते हुए रूढ़िग्रस्त समाजं को झिंझोड़ा और ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में विशद विवेचन करते हुए संकीर्ण विचारधाराओं पर कुठाराघात किया। आधुनिक भारत के नव-निर्माण में उनकी विचारधारा ने मशाल का काम किया। आर्य समाज की स्थापना के द्वारा उन्होंने…
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
मोहन राकेश अपने पात्रों के माध्यम से जिन्दगी के यथार्थ की बेतरतीब तसवीर प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्र, चाहे मिथकीय हों या आधुनिक, अपनी अर्थवत्ता में पूर्णतः समकालीन हैं। जीवन की त्रासदियों, अस्तित्व संकट तथा मूल्य-संक्रमण की स्थितियों से गुजरते हुए ये पात्र अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं के नीचे दबे बिखर-बिखर जाते हैं। तथापि उनकी संवेदनशीलता…
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स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान जिन नेताओं का व्यक्तित्व पूरी प्रखरता से उभरा तथा जो आगे आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बने, उनमें गोपाल कृष्ण गोखले का नाम अग्रणी था। यद्यपि वे काँग्रेस के उदारवादी नेता थे तथापि ‘वे आधुनिक भारत के प्रथम कूटनीतिज्ञ थे।’ गोखले के विषय में के. एम. पन्निकर की यह उक्ति…
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₹995.00 Original price was: ₹995.00.₹796.00Current price is: ₹796.00.
भारत में सामाजिक परिवर्तन’ शीर्षक कृति सामाजिक विज्ञानों के उन शोधकर्ताओं एवं रुचिशील पाठकों के लिए लिखी गई है जो सामाजिक परिवर्तन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं से अवगत होना चाहते हैं। विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के पाठकों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए इस कृति में तीन खण्ड हैं। प्रथम खण्ड में सामाजिक परिवर्तन की…
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
वही राष्ट्र और जाति प्रगति के शिखरों का स्पर्श करते हैं जो अपनी जमीनी वास्तविकताओं को चिन्ता के केन्द्र में रखते हैं। किसी प्रजातन्त्र की नींव तभी मजबूत हो सकती है जब तृणमूल स्तर पर उसकी सक्रियता पूर्ण निष्ठा के साथ हो तथा इस सक्रियता में दूर-दराज फैले अंचलों की महिलाओं की भी भागीदारी हो।…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
शम्भुनाथ ने मिश्रबन्धु के आलोचक व्यक्त्तित्व का पुनर्मूल्यांकन बड़ी निष्ठा, तत्परता और सहानुभूतिपूर्वक किया है। उन्होंने मिश्रबन्धु की इतिहासदृष्टि पर भी नए सिरे से विचार करते हुए परवर्ती इतिहासग्रन्थों पर उसके प्रभाव को भी रेखांकित किया है और इतिहासलेखक आलोचक मिश्रबन्धु की छवि को नयी दीप्ति देने की कोशिश की है। शम्भुनाथ ने निश्चय ही…
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
वर्तमान युग में प्रत्येक व्यक्ति जीवन में स्वस्थ रहने, तनाव रहीत रहने, प्रतिस्पर्धा में बने रहने हेतु खेलों का सहारा लेता है जिसके लिए खेल नियमों की जानकारी होना अति आवश्यक है, क्योंकि खेल की दुनिया में नियमों का अत्यधिक महत्त्व है। ऐसी स्थिति में सभी को खेल नियमों की जानकारी होना अत्यन्त आवश्यक है।…
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सृष्टि के अनादिकाल से आज तक वैज्ञानिक उपलब्धियाँ अपने चमत्कारों से मानव में विज्ञान के प्रति अत्यन्त जिज्ञासा उत्पन्न करती रही हैं। विश्व में नित नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली वैज्ञानिक प्रगति में भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान प्राचीनकाल से उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में महत्त्वपूर्ण रहा है। फलस्वरूप भारत का नाम अन्तर्राष्ट्रीय जगत…
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₹800.00 Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
प्रयोजनमूलक हिन्दी का प्रयोग क्षेत्र सामान्यतः राजकाज की हिन्दी भाषा तक ही सीमित मान लिया जाता है, पर वास्तविकता यह है कि वह प्रारूपण एवं टिप्पण लेखन की कार्यालयी भाषा मात्र नहीं है, वह अपने व्यापक अर्थ में कार्यालयेतर विषयों तक अपनी पहुँच बनाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे समझा और व्यापक रूप से…
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राणा सांगा के नाम से प्रसिद्ध औ। अपने शौर्य और पराक्रम के कारण मिथक बन गये महाराणा संग्राम सिंह भारतीय इतिहास में एक कीर्तिपुरुष के रूप में ख्यात हैं। महाराणा संग्रामसिंह ने अपने अदम्य ‘साहस और दुर्दमनीय पराक्रम से मेवाड़ के बप्पारावल की वंश परम्परा को अक्षुण्ण रखा। उनकी जीवट और जिजीविषा का ही परिणाम…
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मानव के मन में अच्छी वृत्तियों यथा श्रद्धा- भक्ति, दृढ़ता-स्थिरता, दया-करुणा, विवेक-वैराग्य, सत्य-शील, क्षमता-साहस, लज्जा, ग्लानि तथा बुरी वृत्तियों यथा काम-क्रोध, लोभ-मोह, मद-मत्सर- अहंकार, घृणा-हिंसा, प्रमाद-आलस्य आदि के मध्य वर्चस्व का युद्ध अनादिकाल से जारी है। मनुष्य के मन के इसी संघर्ष पर आधारित है यह ‘अन्तस का महाभारत’। इस पुस्तक में अच्छी वृत्तियों की…
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गांधीजी ने भारत के हर बच्चे के लिए अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का सपना देखा था तथा उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान ‘बुनियादी शिक्षा’ का दर्शन स्थापित कर इस दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया था। लेकिन यह विडम्बना ही कही जाएगी कि इक्कीसवीं सदी के आरम्भ में भारत सरकार शिक्षा को मौलिक अधिकार के…