Swami Dayanand Saraswati : Jeevan Aur Vichar
स्वामी दयानंद सरस्वती: जीवन और विचार
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आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानन्द सरस्वती अग्रगण्य हैं। स्वामीजी ने अपने समय की नब्ज को पहचानते हुए रूढ़िग्रस्त समाजं को झिंझोड़ा और ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में विशद विवेचन करते हुए संकीर्ण विचारधाराओं पर कुठाराघात किया। आधुनिक भारत के नव-निर्माण में उनकी विचारधारा ने मशाल का काम किया। आर्य समाज की स्थापना के द्वारा उन्होंने अपनी विचारधारा को वृहत्तर आयाम दिया। समाज के दीन-हीन-वंचित तथा सदियों से दबे-कुचले तबके को आत्म-सम्मान दिलाया। जाति, धर्म के आडम्बर उनके चिन्तन से नग्न हुए और एक यथार्थवादी तर्क पर आधारित सोच उजागर हुआ। आर्यों की महत्ता और वैदिक आर्यावर्त का सम्मान ब्रिटिश भारत में पुनः प्रतिष्ठित हुए। वैदिक साहित्य को पुनः अन्वेषित करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वेदों की स्वस्थ व्याख्या की, जिससे सदियों से सोया भारत जाग उठा। जाति उन्मूलन, स्त्री शिक्षा, दलित आन्दोलन एवं नारी विमर्श की समस्याओं पर पहली बार स्वामी दयानन्द सरस्वती ने कलम उठाई। वे उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम चरण के सबसे महत्त्वपूर्ण समाज सुधारक थे जिनकी ऐतिहासिक भूमिका को प्रस्तुत कृति तर्कपूर्ण ढंग से रेखांकित करती है। स्वामीजी जैसे इतिहास पुरुषों के योगदान को समझकर ही हम आधुनिक भारत के समाज का विकास देख सकते हैं, इस दृष्टि से यह कृति अपना विशिष्ट महत्त्व रखती है।
| Weight | 275 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |













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