Meera (Atihasik Upanyas)
मीराँ (ऐतिहासिक उपन्यास)
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Meera (Atihasik Upanyas) हरदान हर्ष का ऐतिहासिक उपन्यास ‘मीराँ’ राजस्थान की पुण्य भूमि में जन्मी अनन्य भक्त मीराँ के संपूर्ण जीवन-चरित्र का जीवंत चित्रण है। यह कृति उनकी बाल्यकाल से भक्तिभावना, मेवाड़-अधिपति राणा सांगा की पुत्रवधु बनने, और पति की मृत्यु के बाद पूर्णतः कृष्णमय होकर बृन्दावन व द्वारिका में शेष जीवन बिताने की कहानी को तत्कालीन समाज, राजनीति और धार्मिक परिदृश्य के साथ कुशलतापूर्वक प्रस्तुत करती है।
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राजस्थान की पुण्य भूमि में राणा सांगा और राणा प्रताप जैसे शूरवीर हुए तो मीराँ जैसी अनन्य भक्त भी। अपनी भक्ति के उद्रेक तथा अपनी प्रतिभा से वह एक कवयित्री बनी। मेड़ता नरेश राव दूदा की छत्र-छाया में पली-बढ़ी मीराँ मेवाड़- अधिपति राणा सांगा की पुत्रवधु बनी। बाल्यकाल से ही भक्तिभावना में लीन होने से पति कुमार भोजराज की मृत्यु के बाद वह पूर्णतः कृष्णमय हो गई। वैरागिन होकर उसने बृन्दावन और द्वारिका में अपना शेष जीवन व्यतीत किया। प्रस्तुत उपन्यास में मीराँ के सम्पूर्ण जीवन-चरित् के साथ-साथ तत्कालीन समाज का जीवन्त चित्रण है। उस समय के रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार, राजनैतिक उठा-पटक और धार्मिक परिदृश्य को कथानक के साथ उपन्यासकार ने कुशलतापूर्वक चित्रित किया है। साथ में आवश्यक कल्पना तत्त्व के साथ ऐतिहासिक तथ्यों को बिना तोड़े-मरोड़े प्रस्तुत किया गया है। ऐतिहासिक घटनाओं को पुष्ट करने हेतु इस उपन्यास में मीराँ के अनेक पदों को अन्तर्साक्ष्य के रूप में उद्धृत किया गया है। इससे मीराँ का कवि रूप भी सामने आ गया है। इस उपन्यास को पढ़ते समय आपको लगेगा कि मीराँ अपने समय से बहुत आगे थी। वह केवल तर्कसंगत परम्पराओं का ही अनुकरण करती थी। रूढ़ कुरीतियों का विरोध करती मीरा में एक विद्रोहिणी मीराँ की झलक भी इस रोचक उपन्यास में पाठकों को देखने को मिलेगी।
सरल, सजीव और सरस भाषा में हरदान हर्ष द्वारा लिखित यह उपन्यास पठनीय एवं संग्रहणीय है। एक रचनात्मक कृति के रूप में इस कृतित्व का स्वागत होगा।
| Weight | 285 g |
|---|---|
| Dimensions | 21 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |















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Bal Apradh
Research Methodology
Upbhokta Ka Arthashastra Evam Upbhokta Sanrakshan
Hindi Nibandh
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