Madyakalin Bharat Ka Itihas (1526-1656 E.)
मध्यकालीन भारत का इतिहास (1526-1656 ई.)
Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
You Save 20%
In stock
मुगल सम्राटों में बाबर से लेकर शाहजहां तक का युग मुगल साम्राज्य के उत्थान के रूप में स्मरण किया जाता है। मुगल सम्राट्-बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहांगीर और शाहजहां में अकबर को छोड़कर शेष सम्राट् बहुत अधिक बुद्धिमान या दूरदर्शी नहीं थे। बाबर और हुमायूँ तो इस देश की भूमि से जुड़ ही नहीं पाये। भारत की गर्म जलवायु से क्लान्त उनका मन काबुल, कंधार और हेरात की हरी-भरी वादियों में विचरता था। उस समय में गैर-इस्लामी देश के रूप में भारतीयों के प्रति शत्रुता का भाव निरन्तर बना रहा। अपने साम्राज्य विस्तार के अतिरिक्त भारत के प्रति उनका कोई लगाव नहीं था। अकबर केवल ऐसा सम्राट था जिसने इस देश की प्रकृति, परम्पराओं और स्वभाव को एक भारतीय के समान समझने का प्रयत्न किया। वह यह जान गया था कि इस देश के लोगों के सहयोग और स्नेह के बिना इस मुल्क पर राज्य करना सम्भव नहीं है। अनपढ़ होने के बावजूद अकबर चतुर, साहसी और कूटनीतिज्ञ एवं एक विचारवान पुरुष था। उसने भारतीय परम्पराओं को अपनाकर प्रत्येक स्तर पर भारतीय मन में प्रवेश किया। सम्भवतः वह स्वयं अपने को एक राष्ट्रीय सम्राट के रूप में प्रस्तुत करना चाहता था। 1554 से 1658 तक का एक शताब्दी का ऐतिहासिक विवरण इस बात को पुष्ट करता है कि वह एक सीमा तक इस उद्देश्य में सफल भी हुआ था। अपनी राजनीतिक शक्ति के समान अकबर ने सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अपने विचारों को सशक्त अभिव्यक्ति दी। अकबर के द्वारा इतिहास लेखन की जिस परम्परा का राजकीय स्तर पर प्रारम्भ हुआ उसकी परिणति अनेक ग्रन्थों के रूप में हुई। जिनके विश्लेषण से आज उस युग के ऐतिहासिक सत्य को प्रत्यक्ष करना सम्भव है। अकबर के शतपथी विचार न केवल उसके राजपूत सम्बन्धों, हिन्दू परम्पराओं के अपनाने, धर्मों के मूल को आत्मसात करने, इस्लाम के रूढ़िवादी पक्ष को त्यागने, मनसबदारी प्रथा और दीन-ए-इलाही के रूप में व्यक्त हुए हैं बल्कि उसके मन की सरलता चित्र लिखने और फतेहपुर सीकरी के भवनों के रूप में भी प्रगट हुई है। उसके जैसी राजनीतिक, प्रशासनिक और धर्म की जनाकूल पारदर्शिता अन्य किसी युग में दुर्लभ है। जहाँगीर और शाहजहां ने अकबर के उपायों में व्यक्त उसकी आन्तरिक भावना को समझने का प्रयत्न नहीं किया। वे विलासी जीवन और बाह्य जगत के मनोहारी स्वरूपों में खोए रहे। कुरानों की आयतों में लिपटा हुआ श्वेत मोती के समान ताजमहल शाहजहां के मन में बसी मुमताज महल की समुज्जवल छवि को प्रत्यक्ष करता है। वस्तुतः इस समय की इमारतों में अलंकरण जैसे मुगल चित्रों के हाशिये का विस्तार है। यह युग सांस्कृतिक दृष्टि से निश्चय ही मुगल इतिहास का स्वर्ण युग था।
| Weight | 640 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 3 cm |











Rajasthan ke Itihas ka Sarvekshan (Praramb se 1956 I. tak)
Bharat ka Itihas (1000 se 1707 I.)
Gopal Krishna Gokhale: Jeevan Aur Darshan
Bharat Ka Itihas (1707-1884 E. tak)
Purano Ki Kahaniya
Vishav ke Adbhut Samundree Jeev
Gadhya Sahitya
Vishva ka Pradeshik Bhugol
Aadhunik Bharat Ka Rajneetik Aarthik Avam Samajik Itihas (Bhagh-2)
Bhumi Vyavastha Evam Bhumi Prabandh Prashasan
Vishva Shanti ka Gandhiya Pratiman
Bhartiya Tyohar
Bharat ka Itihas (Prarambh se 1000 I. tak)
Prasar Shiksha
Kathetar Gadhya Sahitya
Udbhav Shatak
Aacharya Chanakya
Rajasthan ke Lok Teerth, Paryatan evam Puratatvik Sthal
Sanvidhan Shankaye Aur Sambhavnaye
Sanjh Ho Gayi
Ganit Ka Jadu
Sudamacharit
Bal Apradh
Reviews
There are no reviews yet.