“प्रतिनिधि कहानियां: हेतु भारद्वाज” has been added to your cart.
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₹800.00 Original price was: ₹800.00.₹600.00Current price is: ₹600.00.
भारतीय ग्रामीण स्थानीय प्रशासन नव आयामों से युक्त ऐतिहासिक व्यवस्था है। 73वें संविधान संशोधन एवं पश्चावर्ती काल में ग्रामीण स्थानीय संस्थाओं को राष्ट्र-व्यापी एकरूपता एवं संवैधानिक मान्यता से आज इन संस्थाओं ने यथार्थवादी स्वीकार्यता एवं संगठनिक स्वरूप ग्रहण कर लिया है। प्रस्तुत पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालयों की स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के ग्रामीण स्थानीय प्रशासन विषय…
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
आलोच्य कृति ‘सामाजिक विचारक’ समाजशास्त्र के छः विचारकों-तीन पश्चिम के और तीन भारतीय-की जीवनी, शिक्षा, इन पर अन्य विद्वानों का प्रभाव, प्रमुख रचनाएँ, मूल विचार, उद्देश्य, अभिग्रह, पद्धति, परिप्रेक्ष्य, उपागम, सिद्धान्तों और योगदान आदि का क्रमबद्ध और व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। परस्पर सम्बन्धित विचारधाराओं के अनुसार पाठयोजना कार्ल मार्क्स और डी. पी. मुकर्जी, मैक्स…
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प्रायः यह माना जाता है कि ईसा से 2 शताब्दी पूर्व पतंजलि ने सर्वप्रथम योगसूत्र की रचना की तथा योग को ‘योगश्चित्तवृत्ति निरोधः’ रूप में परिभाषित किया। एक ओर जहाँ योग का सम्बन्ध मोक्ष या मुक्ति प्राप्ति से है, वहीं इसका सम्बन्ध शरीर विकास और कायाकल्प से भी है। अब तक पश्चिमी संसार ने भी…
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₹450.00 Original price was: ₹450.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
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कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
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₹125.00 Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
अनुक्रम हिन्दी भाषा तथा हिन्दी का विकास हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ हिन्दी की ध्वनियाँ और उनका विकास हिन्दी शब्द समूह तथा शब्द रचना हिन्दी में वाक्य रचना हिन्दी का अर्थ विज्ञान देवनागरी लिपि : स्वरूप तथा विकास राष्ट्रभाषा हिन्दी का मानकीकरण भारतीय संविधान और हिन्दी हिन्दी : अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ संचार माध्यम और हिन्दी
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₹125.00 Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।
शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
रीतिकालीन मुक्त काव्य धारा के अग्रणी कवि घनानंद का रीतिकाल के कवियों में विशिष्ट स्थान है, क्योंकि घनानंद के काव्य में हृदय की कोमल भावनाओं और प्रेम की पीर की सहज और मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। उनके कवित्तों को पढ़कर लगता है कि घनानंद ने अपने हृदय की घनीभूत पीड़ा को अपने कवित्तों में उंडेल दिया है। कृष्ण भक्त कवि घनानंद मूलतः प्रेम के कवि हैं और प्रेम में भी विप्रलम्भ की हृदयस्पर्शी व्यंजनाओं के क्षेत्र में वे अप्रतिम हैं। मन की गहराई से निकली घनानंद की कविता में ब्रजभाषा का जो स्वाभाविक और परिष्कृत रूप प्रवाहित हुआ है, वह उन्हें काव्य के क्षेत्र में सबसे अलग पहचान देता है। घनानंद के कवि व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले कवित्तों में गहरी वेदना, तीक्ष्ण उपालम्भ तथा प्रेम-विवशताजन्य असहायता के जैसे चित्र उकेरे गये हैं, वे अन्यत्र नहीं मिलते।
प्रस्तुत कृति में लेखक ने आचार्य विश्वनाथ मिश्र द्वारा सम्पादित ‘घनानंद कवित्त’ के प्रथम सौ कवित्तों का भाष्य तथा घनानंद की काव्यगत विशेषताओं का विस्तृत आकलन किया है। यह कृति घनानंद के पाठकों की घनानंद काव्य-विषयक जिज्ञासाओं का सम्यक् समाधान करेगी।
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₹325.00 Original price was: ₹325.00.₹260.00Current price is: ₹260.00.
सामान्यतः पुनर्जागरण से पश्चिमी संसार के आधुनिक युग का प्रास्म्भ माना जाता है। पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप मध्यकालीन मान्यताओं और अन्धविश्वासों का अन्त हुआ। इसने धर्म सुधार आन्दोलन को जन्म दिया जिसने लोगों को चर्च के कट्टर बन्धनों से मुक्त किया। भौगोलिक खोजों तथा वैज्ञानिक आविष्कारों ने उनके कार्यक्षेत्र को विश्वव्यापी आधार प्रदान किया। व्यापार-वाणिज्य के अभूतपूर्व विकास से उपनिवेशवाद की शुरुआत हुई। इसी समय पश्चिमी संसार में राष्ट्र राज्यों की स्थापना हुई जिससे राष्ट्रवाद की भावना को बल मिला। कृषि क्रान्ति और औद्योगिक क्रान्ति ने औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा को परवान चढ़ाया।
इंगलैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति, अमेरिका का स्वतन्त्रता संघर्ष और फ्रांस की राज्य क्रान्ति ने मध्ययुगीन निरंकुशु तन्त्र पर मर्मान्तक प्रहार कर आधुनिक लोकतन्त्र और मानव के मौलिक अधिकारों का मार्ग प्रशस्त किया। उन्नीसवीं सदी का पश्चिमी इतिहास राष्ट्रों की एकता और स्वतन्त्रता क़ा इतिहास रहा। इटली और जर्मनी का एकीकरण सम्पन्न हुआ। राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही पश्चिमी संसार में समाजवादी और मार्क्सवादी विचारधारा का भी तेजी से विकास हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान रूस में बोल्शेविक क्रान्ति सम्पन्न हुई और रूस में साम्यवादी शासन की स्थापना हुई। प्रथम महायुद्ध के बाद इटली, जर्मनी, जापान आदि देशों में अधिनायकवादी विचारधारा का विकास हुआ जिसके परिणामस्वरूप समूचे संसार को द्वितीय विश्वयुद्ध का सामना करना पड़ा। दूसरे महायुद्ध ने पश्चिम की साम्राज्यवादी शक्तियों को इतना कमजोर बना दिया कि वे उपनिवेशों के राष्ट्रीय आन्दोलनों को कुचलने में असमर्थ रहे और यहीं से विउपनिवेशीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई।
प्रस्तुत पुस्तक में सामन्तवाद के उदय से लेकर पश्चिम के औपनिवेशिक साम्राज्य के अवसान तक की प्रमुख घटनाओं का सरल भाषा में वर्णन किया गया है।
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
मेडिकल विज्ञान की दृष्टि से मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि द्वारा विशेष हार्मोन्स का निर्माण होने पर प्यूबर्टी या किशोरावस्था आरम्भ होती है। ये हार्मोन्स जननेन्द्रियों का विकास करते हैं, इन्हीं के कारण किशोरावस्था में शारीरिक- भावात्मक बदलाव होते हैं। इस समय में माता-पिता की भूमिका किशोर बच्चों की समस्याओं को समझकर सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार से उनमें…
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
बालक प्रकृति की, भगवान् की सर्वश्रेष्ठ कृति है, अद्भुत देन है, उपहार है। वे अबोध होते हैं, निश्छल होते हैं, उनका व्यवहार कृत्रिम नहीं होता, वे अपने व्यवहार में बनावटीपन नहीं लाते हैं। बालमन सदैव ही जटिलताओं से परिपूर्ण रहा है। उनका व्यवहार सदैव ही अनबूझा रहा है, पहेली रहा है। कोई नहीं कह सकता,…
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
This book ‘Nutrition and Development of Mothers and Children’ is presented in fifteen chapters. Chapter one & two are for future parents, their responsibilities & allied aspects of normal, subnormal complications during this period. An entire development aspects along with nutrition during pregnancy period are briefly elaborated in chapter three & four through pictures, figures…
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₹600.00 Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
बालक देश के कर्णधार हैं। सृष्टि के अनुपम वरदान हैं। भारत के भविष्य हैं। विश्व के कीर्तिमान हैं। बालक ही समय के साथ पल-बढ़कर किशोर, युवा, प्रौढ़ बनते हैं तथा समस्त जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश को प्रगति के पथ पर ले जाते हैं। अतः उनकी देखभाल, पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा की समुचित व्यवस्था बाल्यकाल से ही…
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
यह पुस्तक मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित विषयों का शैक्षणिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें गर्भावस्था, प्रसव, प्रसवोत्तर अवस्था, शिशु पोषण, रोग प्रतिरोध, तथा मातृ एवं बाल कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विवेचन है। विषयवस्तु स्वास्थ्य, गृह विज्ञान अथवा संबंधित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है। पुस्तक की भाषा हिंदी है तथा आवश्यक स्थानों पर अंग्रेज़ी शब्दावली का प्रयोग किया गया है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.
प्रस्तुत पुस्तक “आओ मॉडल बनाएँ” में विज्ञान से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के मॉडलों को सरल एवं चित्रों सहित समझाया गया है। इस पुस्तक में सभी मॉडलों की क्रियाविधि को सरल माध्यम से बताया गया है, जिससे कोई भी विद्यार्थी अपनी आवश्यकता का मॉडल तैयार कर सके। पुस्तक में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं…
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.
भारतीय धर्म ग्रन्थों में महाभारत को न केवल महत्त्वपूर्ण माना जाता है बल्कि पवित्र भी माना जाता है। इससे हमें धर्म एवं कर्म का संदेश मिलता है तथा श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय संस्कृति से सम्बद्ध कहानियों को सरल एवं रोचक शैली में पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास…