कमलेश्वर के कथा-साहित्य में मध्यवर्ग
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Kamleshwar ke Katha Sahitya mein madhyavarg कमलेश्वर, स्वातंत्र्योत्तर काल के संवेदनशील रचनाकार, ने नई कहानी आंदोलन के प्रणेता के रूप में अभूतपूर्व कार्य किया। डॉ. विमलेश शर्मा की यह कृति कमलेश्वर के समस्त कथा-साहित्य का मध्यवर्गीय जीवन के केंद्र में रखकर विश्लेषण करती है, जिसमें भारतीय मध्यवर्ग के संघर्षों, विद्रूपों और बदलते वक्त की विडम्बनाओं का सजीव चित्रण मिलता है।
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कमलेश्वर हमारे समय के बहुत संवेदनशील रचनाकार रहे हैं। स्वातंत्र्योत्तर काल में उन्होंने अनेक स्तरों पर अभूतपूर्व कार्य किया। पहले नई कहानी आन्दोलन के प्रणेताओं में रहे और कहानी में आये बदलाव को सर्वथा नयी दृष्टि से रेखांकित किया। ‘सारिका’, ‘नई कहानियाँ’, ‘गंगा’ जैसी पत्रिकाओं का सम्पादन कर हिन्दी कहानी के विकास को विभिन्न स्तरों पर देखा। ‘समान्तर कहानी’ आन्दोलन की अगुवाई की। ‘दूरदर्शन’ के महानिदेशक के रूप में इस माध्यम को नया रूपाकार दिया।
किन्तु इस सारे उपक्रम में कमलेश्वर को स्वतंत्र भारत में विकसित हुए मध्यवर्ग के चितेरे कथाकार के रूप में विशेष ख्याति मिली। उनकी कहानियों तथा उनके उपन्यासों में भारतीय मध्यवर्ग के संघर्षों और विद्रूपों का सजीव चित्रण मिलता है। ग्रामीण परिवेश से लेकर महानगरीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपजे मध्यवर्ग की विडम्बनाओं का विश्वसनीय चित्रण उनके कथा-साहित्य में मिलता है।
इस कृति की लेखिका ने कमलेश्वर के समस्त कथा-साहित्य का विश्लेषण मध्यवर्गीय जीवन के केन्द्र में रखकर किया है। कमलेश्वर के कथा-साहित्य की रचनाशीलता को समझने में यह कृति बहुत सहायक सिद्ध होगी। लेखिका की भाषा बहुत प्रौढ़ है तथा उनकी अभिव्यंजक भंगिमा पाठक को प्रभावित करती है। कमलेश्वर के कथा-साहित्य के वैशिष्ट्य को यह कृति अनेक स्तरों पर खोलती है।
| Weight | 410 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |





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