“मध्यकालीन भारत का इतिहास (1656-1761 ई.)” has been added to your cart.
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₹325.00 Original price was: ₹325.00.₹260.00Current price is: ₹260.00.
यह पुस्तक स्वास्थ्य विज्ञान के अंतर्गत मानव शरीर की संरचना, शारीरिक क्रियाओं, पर्यावरणीय स्वच्छता, संक्रमण, पोषण तथा सामुदायिक स्वास्थ्य से संबंधित मूलभूत ज्ञान प्रस्तुत करती है। इसमें कोशिका, ऊतक, विभिन्न तंत्रों, रोगों, स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े विषयों को शैक्षिक दृष्टिकोण से समाहित किया गया है। यह पुस्तक स्वास्थ्य एवं जीवविज्ञान से संबंधित अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।
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₹325.00 Original price was: ₹325.00.₹260.00Current price is: ₹260.00.
सृष्टि की अनमोल कृति, भारत का भविष्य, ईश्वर का अनुपम वरदान तथा माता-पिता के प्राण हैं ‘बालक’। ये ही राष्ट्र व विश्व की शान हैं। इन्हीं के सबल कंधों पर भारत का भविष्य टिका है। बालक ही पल-बढ़कर देश का कर्णधार बनता है तथा शासन की बागडोर संभालता है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाता है तथा विकास का परचम सम्पूर्ण विश्व में लहराता है। वह अपने महान आविष्कारों, साहसिक कारनामों, अद्भुत कला- कृतियों व तेजस्वी बुद्धिमत्ता से सम्पूर्ण संसार को लाभान्वित करता है तथा देश का मान बढ़ाता है। उसमें गूढ़ रहस्यों को समझने एवं जटिल समस्याओं को सुलझाने की अद्भुत क्षमता एवं विलक्षण गुण होता है।
मगर ऐसा तभी सम्भव है जब बालक शिक्षित, योग्य, कुशल, कर्मठ, मेहनतकश एवं लगनशील होगा। इसके लिए शैशवावस्था से ही बालकों के लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा, आचरण-व्यवहार पर ध्यान देना होगा। उन्हें पग-पग पर संभालना जरूरी है अन्यथा दुष्प्रवृत्तियों के अंधड़ के थपेड़ों को वे नन्हें बालक सह नहीं पाएँगे और असमय ही काल के ग्रास बन जाएँगे। यदि वे जीवित भी बचेंगे तो रोगी, कामचोर, आलसी, सुस्त, चरित्रहीन होंगे जो न तो अपना भला कर पाएँगे और न ही देश का। ऐसे बालकों से समाज सुधार व विकास की अपेक्षा नहीं की जा सकती, अपितु वे तो परिवार, समाज व राष्ट्र के लिए कलंक होंगे। इसलिए बालकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए बाल विकास का अध्ययन किया जाना जरूरी है।
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₹995.00 Original price was: ₹995.00.₹796.00Current price is: ₹796.00.
हमारे शास्त्रों में मनुष्य के स्थूल शरीर के साथ एक सूक्ष्म शरीर की कल्पना की गयी है। स्थूल शरीर की रचना पाँच तत्त्वों से हुई मानी गई है तो सूक्ष्म शरीर की पाँच कोशों से। इनमें सबसे पहला अन्नमय कोश है। वह आधारभूत कोश है-प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश तथा ज्ञानमय कोश उसके ही…
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₹800.00 Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
जैसा खाये अन्न वैसा रहे मन”, यह कोई कहावत नहीं अपितु परम सत्य है। कर्मठता, उद्यमशीलता, सहनशीलता एवं लगनशीलता का सीधा सम्बन्ध संतुलित एवं पौष्टिक आहार से है। भोजन से शरीर को ऊर्जा मिलती है जिससे शरीर की विभिन्न शारीरिक एवं मानसिक क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं। शरीर की वृद्धि, विकास, तन्तुओं की मरम्मत, रोगों से…
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₹80.00 Original price was: ₹80.00.₹72.00Current price is: ₹72.00.
Lala Gokulchand Kr̥ta Begama Samru Ka Itihas लाला गोकुलचंद कृत बेगम समरू का इतिहास, ब्रिटिश लाइब्रेरी की फारसी पांडुलिपियों से लिया गया एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है। महेंद्र नारायण शर्मा और राकेश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत यह कृति सरधना रियासत की सफल शासिका बेगम समरू के अनछुए प्रसंगों को उजागर करती है, और मुगल साम्राज्य के पतन तथा साम्राज्यवादी इतिहास-लेखन को समझने में सहायक है।
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₹450.00 Original price was: ₹450.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
Kishoravastha : Samasya aur Samadhan ‘किशोरावस्था: समस्या और समाधान’ मानव जीवन की सबसे सुंदर और स्वर्णिम अवस्था को स्वर्णिम बनाने का प्रयास करती है। डॉ. बृन्दा सिंह की यह पुस्तक किशोरवय के बालक-बालिकाओं को सही राह चुनने, गलत संगति से बचने और सफल जीवन जीने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करती है, जो माता-पिता, शिक्षाविदों और योजनाकारों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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₹800.00 Original price was: ₹800.00.₹640.00Current price is: ₹640.00.
Samay Prabandhan Evam Karya Saralikaran “समय किसी का इंतजार नहीं करता” – इस अनमोल तथ्य को उजागर करती यह पुस्तक, डॉ. बृन्दा सिंह द्वारा प्रस्तुत है। यह समय प्रबंधन और कार्य सरलीकरण के गुर सिखाती है, जिससे व्यक्ति कम-से-कम समय में अधिक धनार्जन और विद्यार्जन करके जीवन को सुखमय बना सके। यह गृह विज्ञान की छात्राओं, अध्यापिकाओं, और गृहिणियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹315.00Current price is: ₹315.00.
Saltantakalin Itihaskar Evam Itihas-Lekhan भारतीय वाङ्मय में इस्लाम की सबसे बड़ी देन इतिहास-लेखन के रूप में है। डॉ. अशोक कुमार सिंह की यह कृति सल्तनतकालीन इतिहास लेखकों—हसन निजामी, मिनहाज सिराज, अमीर खुसरो, जियाउद्दीन बरनी—की कृतियों की विवेचना करती है। यह फारसी इतिहास-लेखन परंपरा के प्रभावों और इस काल के इतिहास-लेखन के गुण-दोषों पर प्रकाश डालती है।
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹450.00Current price is: ₹450.00.
Sachitra Hast Rekha Vigyan ज्योतिष का एक संपूर्ण और प्रामाणिक शास्त्र, ‘सचित्र हस्त रेखा विज्ञान’ मानव जीवन के सभी पहलुओं पर विचार करता है। यह हथेली की रेखाओं, हाथों के रूपाकार, और उनके प्रभावों का सचित्र अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक स्वयं को ठगे जाने से बच सकते हैं और व्यावहारिक जीवन में अमंगल से रक्षा कर सकते हैं।
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
समकालीन प्रशासनतंत्र न केवल समाज की सर्वांगीण स्थिति को प्रभावित करता है अपितु अन्त में वह इसी का अंग बन जाता है। मुग़ल शासन प्रणाली मोटे रूप से मध्य एशियाई, तुर्की तथा ईरानी परम्पराओं पर आधारित थी परन्तु भारतीय व्यवस्था के सम्पर्क में आने के बाद यह सम्भव नहीं था कि ये उससे अछूती रह…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
1858 के बाद के भारत का परिदृश्य पिछली शताब्दी से सर्वथा भिन्न था। इस युग का केन्द्रीय विषय भारतीय बौद्धिक मन पर पाश्चात्य प्रभाव है। 1857 के पूर्व ही भारत में एक राष्ट्रीय चेतना का जन्म हो चुका था जो एक लम्बी प्रक्रिया का परिणाम थी। अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से भारतीय विचारों में जो…
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.
डॉ. रमाकान्त शर्मा इधर के उन समीक्षकों में से प्रमुख हैं जिन्होंने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और डॉ. रामविलास शर्मा की आलोचना को सहज समकालीनता के मिजाज से विकसित किया है। । प्रस्तुत पुस्तक महत्त्वपूर्ण इसलिए है कि यहाँ कविता के नये प्रतिमानों से गहरी असहमति जता कर कुछ ऐसे प्रतिमानों तथा काव्य सिद्धान्तों का विनम्र…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय समाज से सम्बन्धित प्रमुख समस्याओं और मुद्दों की समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विवेचना की गई है। सर्वप्रथम निर्धनता, जाति की असमानता और लिंग असमानताओं की समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। भारत में धार्मिक, नृजाति एवं क्षेत्रीय असामंजस्यताओं के अर्थ, कारण, दुष्परिणाम, निवारण के उपायों एवं सुझावों की विवेचना की गई है।…
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
समाज भाषा विज्ञान अपेक्षाकृत अर्वाचीन ज्ञानशाखा है। इसका अध्ययन अभी अपने प्रथम चरण में ही है। समाज भाषा विज्ञान की दृष्टि में भाषा केवल ध्वनियों, पदों और वाक्यों का समूह मात्र नहीं है। यह एक सजीव संप्रेषण माध्यम है, और समाज के सम्पूर्ण चिन्तन प्रवाह और आन्तरिक-बाह्य व्यवस्था को अभिव्यक्त करती है। प्रस्तुत पुस्तक भाषा…
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₹125.00 Original price was: ₹125.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
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₹600.00 Original price was: ₹600.00.₹480.00Current price is: ₹480.00.
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
किसी भी सुदृढ़ साम्राज्य की सततता के लिए स्थायी, दृढ़ और जनकल्याण उत्प्रेरक नीतियों की स्थापना अनिवार्य प्रक्रिया है। दूरदर्शी अकबर ने मुगल साम्राज्य को जो राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव प्रदान किया था वह औरंगजेब और उसके उत्तराधिकारियों के युग में धराशायी हो गया। मुगलों में उत्तराधिकार की स्थायी और निश्चित परम्परा न होने से…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मुगलों के पतन के पश्चात् एक शताब्दी का इतिहास तीन शक्तियों-मराठा, उत्तर मुगल और अंग्रेज के मध्य सत्ता संघर्ष का इतिहास है। अट्ठारहवीं शताब्दी में अब्दाली के आक्रमण और मुगल अमीरों और सामन्तों के पारस्परिक झगड़ों के कारण मुगल साम्राज्य का अखिल भारतीय स्वरूप समाप्त हो गया। वह केवल दिल्ली का राज्य मात्र रह गया।…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
इतिहासकारों के अथक् प्रयत्नों से प्राचीन भारत का राजनीतिक इतिहास, मूल स्त्रोतों के क्षीण होते हुए भी, अब स्थूल आकार-प्रकार में रेखांकित किया जा सकता है। हड़प्पा सभ्यता की अन्वेषण से वैदिक साहित्य के अर्थ पर नया प्रकाश पड़ा है। अभिलेखों ने कलियुग की पौराणिक वंशावलियों की सत्यता का समर्थन किया है। पौराणिक इतिहास वैदिक…
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₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
1920 के बाद का भारतीय इतिहास गांधीवादी युग से सम्बन्धित है। इस युग में गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों के अनुसार ही राष्ट्रीय आन्दोलन प्रगतिमान हुआ। भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन गांधीजी की उपलब्धियों का इतिहास है। गांधीजी के पूर्व विश्व में सशस्त्र क्रान्ति ही स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक मात्र मार्ग माना जाता था। गांधीजी ने इस…