बाल विकास
Original price was: ₹325.00.₹260.00Current price is: ₹260.00.
सृष्टि की अनमोल कृति, भारत का भविष्य, ईश्वर का अनुपम वरदान तथा माता-पिता के प्राण हैं ‘बालक’। ये ही राष्ट्र व विश्व की शान हैं। इन्हीं के सबल कंधों पर भारत का भविष्य टिका है। बालक ही पल-बढ़कर देश का कर्णधार बनता है तथा शासन की बागडोर संभालता है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाता है तथा विकास का परचम सम्पूर्ण विश्व में लहराता है। वह अपने महान आविष्कारों, साहसिक कारनामों, अद्भुत कला- कृतियों व तेजस्वी बुद्धिमत्ता से सम्पूर्ण संसार को लाभान्वित करता है तथा देश का मान बढ़ाता है। उसमें गूढ़ रहस्यों को समझने एवं जटिल समस्याओं को सुलझाने की अद्भुत क्षमता एवं विलक्षण गुण होता है।
मगर ऐसा तभी सम्भव है जब बालक शिक्षित, योग्य, कुशल, कर्मठ, मेहनतकश एवं लगनशील होगा। इसके लिए शैशवावस्था से ही बालकों के लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा, आचरण-व्यवहार पर ध्यान देना होगा। उन्हें पग-पग पर संभालना जरूरी है अन्यथा दुष्प्रवृत्तियों के अंधड़ के थपेड़ों को वे नन्हें बालक सह नहीं पाएँगे और असमय ही काल के ग्रास बन जाएँगे। यदि वे जीवित भी बचेंगे तो रोगी, कामचोर, आलसी, सुस्त, चरित्रहीन होंगे जो न तो अपना भला कर पाएँगे और न ही देश का। ऐसे बालकों से समाज सुधार व विकास की अपेक्षा नहीं की जा सकती, अपितु वे तो परिवार, समाज व राष्ट्र के लिए कलंक होंगे। इसलिए बालकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए बाल विकास का अध्ययन किया जाना जरूरी है।
| Weight | 525 g |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 × 2 cm |
| पाठ्यक्रम प्रणाली | |
| विश्वविद्यालय | ब्रज विश्वविद्यालय, भरतपुर, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर, कोटा विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
| Textbook Genre |
















Reviews
There are no reviews yet.