Vyavsayik Sangathan
व्यवसायिक संगठन
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Vyavsayik Sangathan इस युग में विज्ञान और टेक्नोलॉजी के अप्रत्याशित विकास के फलस्वरूप व्यावसायिक संगठन में अनेक जटिलताएँ आ गई हैं। डॉ. पी.पी. भार्गव की यह पुस्तक उत्पादन की जटिलताओं, राजकीय हस्तक्षेप, विकेन्द्रित व्यवस्था, और प्रतियोगी संस्थाओं का ज्ञान जैसे सभी पहलुओं पर सरल, रोचक और धाराप्रवाह भाषा में विस्तृत विवेचना करती है, जो एक योग्य आर्थिक भविष्य दृष्टा के लिए अनिवार्य है।
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इस युग में विज्ञान और टैक्नालॉजी के अप्रत्याशित विकास के फलस्वरूप व्यावसायिक संगठन में अनेक जटिलताएँ आ गई हैं। उत्पादन की जटिलताओं, राजकीय हस्तक्षेप, सरकारी नियन्त्रण, बड़े-बड़े समूहों के निर्माण, विकेन्द्रित व्यवस्था पर आधारित कलेवर आदि कारणों से इस संगठन की समस्याएँ पहले से ज्यादा जटिल हो गई हैं।
व्यवसायी में मानव, माल और मशीन जुटाने के लिये दूरदर्शिता, प्रतियोगिता का सामना करने के लिये योजना बनाने की क्षमता, राष्ट्र की आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन, प्रतियोगी संस्थाओं व सरकारी नीतियों का ज्ञान जरूरी हो गया है। संगठनकर्ता के रूप में व्यवसाय किस स्थान पर चलाया जाय, उसका ले-आउट कैसा हो, कुल कितनी पूंजी की आवश्यकता होगी और वह किन- किन स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है, सम्बन्धी निर्णय लेने होते हैं। वस्तु के विज्ञापन, वितरण और विक्रय व्यवस्था, नये बाजारों की खोज और अनुसंधान कार्य भी उसे ही करने होते हैं। एक योग्य आर्थिक भविष्य दृष्टा के रूप में उसे बाजार की भावी दशाओं, मूल्य-स्तर, संभावित प्रतिस्पर्द्धा, संभावित मांग, फैशन, स्टाइल सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अनुमान लगाना पड़ता है। प्रस्तुत पुस्तक में इन सभी पहलुओं पर सरल, रोचक और धाराप्रवाह भाषा में उनकी विषद् विवेचना करते हुए पर्याप्त प्रकाश डाला गया है।
| Weight | 525 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |






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