Vishv ki Vilakshan Machliyein
विश्व की विलाक्षण मछलियाँ
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Vishv ki Vilakshan Machliyein विश्व की विलक्षण मछलियों का रोचक और ज्ञानवर्धक परिचय। डॉ. परशुराम शुक्ला द्वारा लिखित यह पुस्तक मछलियों की शारीरिक संरचना, भोजन, प्रजनन, और उनकी आदतों में पाई जाने वाली आश्चर्यजनक विविधताओं को दर्शाती है। यह मछलियों के विषैले होने, समागम नृत्य, और लिंग बदलने जैसी अद्भुत क्षमताओं का वर्णन करती है, जो समुद्र विज्ञान के नवीनतम शोधों पर आधारित है।
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मछलियों से हम सभी परिचित हैं। इनकी शारीरिक संरचना इस प्रकार की होती है कि हम इन्हें देखते ही पहचान लेते हैं। मछलियाँ विश्व के सभी जल स्रोतों में पायी जाती हैं। इन्हें नदियों, झीलों, तालाबों आदि के साथ ही सागरों और महासागरों में भी देखा जा सकता है। इनका निवास विविधतापूर्ण होता है। कुछ मछलियाँ चट्टानों की दरारों में जलीय पौधों के मध्य अथवा मूँगे की चट्टानों में रहती हैं, कुछ मछलियाँ अपना सीमाक्षेत्र बनाती हैं और इसके बाहर नहीं जातीं। इसके विपरीत कुछ मछलियाँ सैकड़ों किलोमीटर लम्बी यात्राएँ करती हैं।
मछलियों की शारीरिक संरचना सामान्तया सरल होती है, किन्तु कुछ मछलियों की संरचना बड़ी विचित्र होती है। कुछ मछलियों के फेफड़े जैसे अंग विकसित हो गये हैं। ये पानी के बाहर भी लम्बे समय तक जीवित रह सकती हैं। समुद्री घोड़े की शारीरिक संरचना इस प्रकार की होती है कि इसमें मादा के स्थान पर नर प्रजनन करता है।
मछलियों का भोजन और प्रजनन सम्बन्धी व्यवहार बड़ा रोचक होता है। कुछ मछलियाँ बड़ी सीधी होती हैं तथा कुछ बड़े आक्रामक ढंग से अपने से बड़े जीवों का शिकार करती हैं। कुछ मछलियाँ स्वजाति भक्षी होती हैं। ये अपने ही अण्डे और बच्चे खा जाती हैं।
सामान्यतया मछलियों के अण्डों का निषेचन स्वतन्त्र रूप से पानी में होता है, किन्तु कुछ मछलियाँ समागम करती हैं और जीवित बच्चों को जन्म देती हैं। ग्रुपर जैसी मछलियों में अपना सेक्स बदलने की अद्भुत क्षमता होती है।
समुद्र विज्ञान के विकास के बाद मछलियों के सम्बन्ध में अनेक आश्चर्यजनक जानकारियाँ प्राप्त हुई हैं, जिन्हें इस पुस्तक में स्थान दिया गया है।
| Weight | 420 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |
















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