Urja Sampdayen avam Prabandhan
ऊर्जा सम्पदाएँ एवं प्रबन्धन
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Urja Sampdayen avam Prabandhan पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों पर केंद्रित यह पुस्तक, ऊर्जा के प्रकारों, ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा प्रबंधन को विस्तार से समझाती है। डॉ. डी. के. ठाकुर की यह कृति ग्लोबल वार्मिंग, मानव स्वास्थ्य पर खतरे, और जैव प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालती है, जो पर्यावरणविदों और पाठकों के लिए उपयोगी है।
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पृथ्वी के तापमान में वृद्धि के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इस कारण जलवायु में परिवर्तन से मानव स्वास्थ्य पर खतरा मंडराता नज़र आ रहा है। यह खुलासा हाल में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र संघ की ‘जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर खतरा और समाधान’ नामक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों के चलते विश्व भर में डेढ़ लाख लोग सन् 2000 में ही काल कवलित हो गए। संयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संयुक्त रूप से तैयार इस रिपोर्ट में प्रदूषित पानी से खाद्य पदार्थों विषाक्त होने की बात कही गई है। साथ ही इस रिपोर्ट में पृथ्वी के तापमान में हो रही वृद्धि से वातावरण में हो रहे परिवर्तनों का मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का विशद रूप से वर्णन किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि बीती शताब्दी का नवम दशक मानव इतिहास में सबसे गर्म रहा। यही नहीं, पिछली गर्मियों में ही बीस हजार लोग लू की अधिकता के चलते मारे गए।
जैव प्रौद्योगिकी जैविक अनुसंधान के एक प्रायोगिक क्षेत्र के रूप में उदय हुई है जिसका उपयोग कृषि, वानिकी, उद्योग और साथ ही साथ औषधि में होता है। विश्वव्यापी स्तर पर एक और महत्त्वपूर्ण क्षेत्र जो अभी हाल ही में प्रकट हुआ है वह है जैव प्रौद्योगिकी के पर्यावरणीय अनुप्रयोग वायु, जल और भूमि के विभिन्न प्रदूषकों का प्रबन्ध, निष्कासन और उपचार मूल्य-लाभ और अन्य सीमाओं के कारण स्वीकार्य नहीं हो सकता है। दूसरी कुछ पर्यावरणीय प्रदूषक जो जैवनिम्नीकरण (दुःशास्य) प्रतिरोधक हैं जैव आवर्धन की समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में ऊर्जा के प्रकारों, ऊर्जा संरक्षण तथा ऊर्जा प्रबन्धन को विस्तार से समझाया गया है।
| Weight | 385 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |






Bharat Ka Itihas (550-1200 C.E.)
Hindi Kavita Me Nari Chetna Ka Vikas
Bharat Ka Itihas (1857 CE Se 1947 CE)
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