Samudayik Swasthya Evam Shiksha
सामुदायिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा
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पहला सुख निरोगी काया’, यह कोरी कहावत नहीं अपितु शत-प्रतिशत सच है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को प्रसन्नतापूर्वक जी सकता है तथा कठिन परिस्थितियों में भी शांत चित्त होकर जटिल-से-जटिल समस्याओं को सुलझा सकता है। वह विद्यार्जन, ज्ञानार्जन एवं धनार्जन कर देश को उन्नति के शिखर तक ले जा सकता है तथा विकास का परचम सम्पूर्ण विश्व में लहरा सकता है। वहीं अस्वस्थ व्यक्ति दुःखी, खिन्न, उदास, निराश, क्रोधित, चिंतित एवं विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं एवं वेदनाओं से ग्रस्त रहता है। ऐसी स्थिति में वह न तो अपना भला कर सकता है और न ही दूसरों का। भविष्य की चिन्ताएँ भी उसे पल-पल सताती रहती हैं। उसकी आय का अधिकांश हिस्सा दवाइयों, विभिन्न प्रकार की जाँच, अस्पतालों के चक्कर काटने तथा चिकित्सकों की फीस के रूप में व्यय हो जाता है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘सामुदायिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा’ में इन्हीं सब विषयों पर गहन प्रकाश डाला गया है, जिसे अपनाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक में न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में बारे में चर्चा की गई है अपितु मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक तथा संवेगात्मक स्वास्थ्य पर भी जोर डाला गया है। इसके साथ ही व्यक्तिगत स्वास्थ्य, सामुदायिक स्वास्थ्य, विद्यालयी स्वास्थ्य, औद्योगिक स्वास्थ्य, पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य शिक्षा जैसे विषयों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। पुस्तक में विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों के बारे में भी चर्चा की गई है तथा उनसे बचाव के उपाय सुझाये गये हैं। भोजन संदूषण, भोजन विषाक्तता जैसे ज्वलंत विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है।
विश्वास है यह पुस्तक न सिर्फ गृह विज्ञानियों के लिए, वरन् होमियोपैथी, नर्सिंग, फार्मेसी, मेडिकल के शिक्षार्थियों तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने वाले आमजनों के लिए भी अति उपयोगी सिद्ध होगी।
| Weight | 750 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 4 cm |
| Author | |
| Textbook Genre |

















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