Hamara Samay Sarokar aur Chintayein
हमारा समय सरोकार और चिंताएँ
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Hamara Samay Sarokar aur Chintayein हेतु भारद्वाज ऐसे रचनाकार हैं जो अपने समय के सवालों से जूझते हैं। ‘हमारा समय सरोकार और चिंताएँ’ नामक यह पुस्तक स्त्री की अस्मिता, पुरुष की पितृसत्तात्मक संस्कारों से मुक्ति, और राजनीति में अमर्यादित भाषा के प्रयोग जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से विचार करती है। यह कृति पाठक को बहस के लिए आमंत्रित करती है, उन्हें झकझोरती है और सोचने पर विवश करती है, जिसमें सही कहने की क्षमता का भी आभास होता है।
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जब हम स्त्री की अस्मिता की बात करते हैं तो सबसे जरूरी यह है कि पहले पुरुष स्वयं पितृसत्तात्मक संस्कारों से मुक्त हो, पुरुष स्त्री का स्वामी है, इस रुढि से मुक्त हो, क्योंकि ‘स्वामी’ का भाव आते ही स्त्री को हम लगभग एक पालतू पशु में परिवर्तित कर देते हैं। और उसे पालतू पशु की कोटि में डाल देते हैं इस पूर्वग्रह से मुक्त हो कि पुरुष स्त्री में श्रेष्ठ है। स्वामी होने, श्रेष्ठ होने जैसे भ्रमों ने स्त्री की अस्मिता को दूसरे दर्जे की नागरिकता प्रदान की है, इसलिए स्त्री की अस्मिता को स्वतंत्र गौरव प्रदान करने के लिए जरूरी है पुरुष की पितृसत्तात्मक संस्कारों से मुक्ति। स्त्री की मुक्ति से पूर्व पुरुष की मुक्ति आवश्यक है, यदि वह अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त हो जाता है तो स्त्री स्वयं मुक्त हो जायेगी। उसकी मानसिकता स्त्री के विकास मार्ग में सबसे बड़ा अवरोध है यदि वह स्त्री के आगे बढ़ने के मार्ग से हट जायेगा तो वह स्वयं आगे बढ़ने का प्रयास करने लगेगी।
इसी पुस्तक से…
| Weight | 445 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |
















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