Daak Tickiton me Rajyon ke Prakartik Pratik
डाक टिकटों में राज्यों के प्राकृतिक प्रतीक
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Daak Tickiton me Rajyon ke Prakartik Pratik डाक टिकटों का संग्रहण एक उदात्त हॉबी है जो मनुष्य को पूरे चराचर जगत् से जोड़ती है। डॉ. परशुराम शुक्ल की यह पुस्तक भारत के विभिन्न प्रदेशों के राज्य-प्रतीकों (पशु, पक्षी, वृक्ष, फूल) का सरस विवरण देती है, जिनका अंकन समय-समय पर डाक टिकटों पर होता रहा है। यह ग्रंथ डाक टिकटों के इतिहास की रंगीन झाँकी प्रस्तुत करता है, जो फिलेटेली के शौकीनों और आम पाठकों के लिए परम उपयोगी है।
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संसार में मनुष्य अनेक प्रकार के शौक पालता है जो उसे व्यक्तिवादी बनाते हैं और सारे संसार से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। डाक टिकटों का संग्रहण अथवा फिलेटेली आधुनिक युग की एक उदात्त होबी (Hoby) है जो मनुष्य को पूरे चराचर जगत् से जोड़ती है। डाक व्यवस्था के आविष्कार ने इस सारी दुनिया को एकसूत्र में बाँधने का पुण्य कार्य किया है। इस कार्य के निष्पादन में डाक टिकटों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। डाक टिकटों का रूपाकार हमारी सौन्दर्याभिरुचियों के अनुरूप तय होता रहा है। इसलिए डाक टिकटों पर जो चित्र अंकित होते हैं, वे हमारी सौन्दर्य भावना को प्रकट करते हैं।
मनुष्य जीवन में कतिपय ऐसे प्रतीक चुनता है जो उसे गरिमा प्रदान करते हैं तथा जिनकी अनुभूति से उसे उदात्तता की अनुभूति होती है। राष्ट्र-ध्वज, राष्ट्रगीत, राष्ट्रकवि, राष्ट्रभाषा आदि ऐसे ही प्रतीक हैं। अपनी विशिष्ट पहचान बनाने के लिए भारत के हर प्रान्त ने अपने प्रतीक – पशु, पक्षी, वृक्ष, फूल आदि तय किये हैं। इन प्रतीकों का प्रकाशन हमारे डाक टिकटों पर भी होता रहता है, जिनसे डाक टिकट सुन्दर ही नहीं बनते बल्कि उनके चित्रण से मनुष्य के भावों की अभिव्यक्ति भी होती है।
प्रस्तुत ग्रन्थ में विद्वान लेखक ने भारत के विभिन्न प्रदेशों के उन प्रतीकों का सरस विवरण दिया है, जिनका अंकन समय-समय पर डाक टिकटों पर होता रहा है। यह ग्रन्थ हमें विभिन्न प्रदेशों के राज्य-प्रतीकों का परिचय देता है तो दूसरी ओर डाक टिकटों के इतिहास की रंगीन झाँकी प्रस्तुत करता है। फिलेटेली का शौक रखने वालों, डाक टिकट विषयक सूचनाएँ एकत्र करने वालों तथा आम पाठकों के लिए यह कृति परम उपयोगी व रोचक सिद्ध होगी।
| Weight | 410 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |
















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