Coat me Tanga Aadmee
कोट में टँगा आदमी
Original price was: ₹400.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.
You Save 10%
Coat me Tanga Aadmee डॉ. अजय अनुरागी का प्रथम कहानी संग्रह “कोट में टँगा आदमी” कथात्मक व्यंग्य और व्यंग्यात्मक कथा का मिश्रण है। ये कहानियाँ कथ्य के स्तर पर पाठकीय संवेदना को उद्वेलित करती हैं और मानवीय विकारों, अभीप्साओं, तथा मनुष्य के अंतस की गहराई का मनोविश्लेषणात्मक आकलन करती हैं, जो समय और परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य के अप्रासंगिक हो जाने की व्यथा को मार्मिकता से बुनती हैं।
In stock
“कोट में टँगा आदमी” वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. अजय अनुरागी का प्रथम कहानी संग्रह है, जिसमें कथात्मक व्यंग्य और व्यंग्यात्मक कथा के मिश्रण को महसूस किया जा सकता है। ये कहानियाँ एक तरफ कथ्य के स्तर पर पाठकीय संवेदना को उद्वेलित करती हैं, वहीं दूसरी तरफ शिल्प के स्तर पर नवीन शैली का दिग्दर्शन भी कराती हैं।
संग्रह की अधिकांश कहानियाँ कथा में व्यंग्य की उपस्थिति को रेखांकित करती चलती हैं तथा पाठकों से मजबूत रिश्ता बनाती चलती हैं। यह प्रबुद्ध पाठकों एवं अध्येताओं पर निर्भर करेगा कि इन्हें कथा में व्यंग्य की श्रेणी में रखा जाए या व्यंग्य- कथा कहा जाए। ये जितनी रोचकता से भरपूर हैं उतनी ही कचोटती भी हैं। हृदयस्पर्शी भी उतनी ही हैं। मानवीय मूल्यों को अपनी आत्मा में सहेजे हुए ये कहानियाँ मानव-विकारों एवं मानव-अभीप्साओं की पर्ते उघाड़ती हैं। मनुष्य के अन्तस की गहराई का मनोविश्लेषणात्मक आकलन भी इन कहानियों में निरन्तर प्रवाहित हुआ है। इनमें समय और परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य के अप्रासंगिक हो जाने की व्यथा भी है। जिस घर का निर्माण श्रम और उत्साह से व्यक्ति करता है वही घर उसे एक दिन उपेक्षित और सामर्थ्यहीन बना देता है। लम्बे खिंचने वाले जटिल रोग भी व्यक्ति के होने और न होने के अंतर को मिटा देते हैं। सब कुछ यथावत चलता रहता है। परिजन धीरे-धीरे उससे कन्नी काटने लगते हैं। ऐसी तमाम स्थितियाँ-परिस्थितियाँ मार्मिकता के साथ इन कहानियों के ताने-बाने में गुँथी हुयी हैं, जो हमारे निकट बोध को स्पर्श करती प्रतीत होती हैं।
संग्रह की अधिकांश कहानियाँ विभिन्न पुरस्कारों से समादृत हैं। निश्चित ही यह कहानी संग्रह पाठकीय प्रेम का पुरस्कार पाने में सफल सिद्ध होगा।
| Weight | 355 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 1.5 cm |
| Genre |
















Padhya Sangrah
Bharat ka Itihas (1526-1756 AD)
Vigyan Sabke Liye : Samanya Vigyan
Reviews
There are no reviews yet.