Aapaad Prabhandhan
आपदा प्रबंधन
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Aapaad Prabhandhan इक्कीसवीं सदी में सारी दुनिया किसी-न-किसी आपदा का प्रभाव झेल रही है। डॉ. बी.सी. जाट की यह पुस्तक प्राकृतिक प्रकोप एवं आपदाओं—भूकंप, ज्वालामुखी, सुनामी, बाढ़, सूखा, चक्रवात, मरुस्थलीकरण—का परिचय, उनके प्रभाव और आपदा प्रबंधन एवं सतत विकास के उपायों पर प्रकाश डालती है, जो शोधकर्ताओं और नियोजनकर्त्ताओं के लिए उपयोगी है।
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इक्कीसवीं सदी में सारी दुनिया किसी-न- किसी आपदा का प्रभाव झेल रही है। आपदायें अब केवल प्राकृतिक न होकर मानव जनित भी हो गई हैं, जिनसे मानव प्रभावित होने के साथ-साथ उनका जनक भी है। प्रस्तुत पुस्तक में वर्तमान में विश्व की सभी प्रकार की आपदाओं की प्रकृति से सम्बन्धित सभी पक्षों को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है जिनमें प्राकृतिक प्रकोप एवं आपदाओं का परिचय, भूकम्प एवं ज्वालामुखी के आपदाकारी प्रभाव, सुनामी आपदा, बाढ़, सूखा, चक्रवात, अलनिनो, मरुस्थलीकरण, मृदा अपरदन, संसाधन संकट, नूतन प्राकृतिक आपदायें, आपदा प्रबन्धन एवं सतत् विकास प्रमुख हैं। आर्शा है यह पुस्तक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्राकृतिक प्रकोप एवं आपदाओं के सम्बन्ध में अध्ययन एवं शोध कर रहे सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के लिए नूतन आंकड़ों सहित संकलित अनुपम कृति सिद्ध होगी।
| Weight | 385 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Textbook Genre |















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