Aao Laut Chale
आओ लौट चलें
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Aao Laut Chale तेजपाल चौधरी का उपन्यास ‘आओ लौट चले’ प्रवाह के विरुद्ध तैरने का साहसिक प्रयास है, जिसका केंद्रीय स्वर जीवन की भव्यता और उदात्तता से जुड़ा है। यह कृति समर्पित अध्यापक, निष्ठावान पत्रकार, प्रतिबद्ध समाज सेवक और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस ऑफिसर जैसे पात्रों के माध्यम से मरुभूमि में ऑयसिस-सी शीतलता की अनुभूति कराती है, जो सर्वथा काल्पनिक नहीं हैं।
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पिछली शताब्दी में विश्व साहित्य में यथार्थवाद की जो बाढ़ आयी, उसमें सत्यम् शिवम् सुन्दरम् के सारे चिरन्तन मूल्य बह गये। शायद यह मान लिया गया कि दुनिया बेहद कुरूप है और साहित्यकार का काम केवल कुरूपता को रेखांकित करना है। अब समय आ गया है, जब साहित्य को कृत्रिम यथार्थ के जामे को उतारकर फेंक देना होगा।
प्रस्तुत उपन्यास प्रवाह के विरुद्ध तैरने का ऐसा ही साहसिक प्रयास है। इसका केन्द्रीय स्वर जीवन की भव्यता और उदात्तता से जुड़ा है। इसमें आप पायेंगे समर्पित अध्यापक, निष्ठावान् पत्रकार, प्रतिबद्ध समाज सेवक और ईमानदार तथा कर्तव्यनिष्ठ पुलिस ऑफिसर ! इनके बीच आपको मरुभूमि में ऑयसिस की-सी शीतलता की अनुभूति होगी।
…और ये पात्र सर्वथा काल्पनिक नहीं हैं। आपने इन्हें भिन्न-भिन्न रूप-नामों के साथ अपने आसपास देखा है।
| Weight | 380 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |








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