Aachrya Chanakya
आचार्य चाणक्य (ऐतिहासिक उपन्यास)
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Aachrya Chanakya भारतीय इतिहास में आचार्य चाणक्य के प्रवेश के साथ ही मौर्य काल का उदय हुआ, जिसने भारतवर्ष को एक विशाल एवं सशक्त साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। हरदान हर्ष का यह उपन्यास चाणक्य के व्यक्तित्व, विचारधारा और उनकी नीति-कुशलता को अभिव्यक्त करता है, जिसमें नंदवंश के विनाश, मौर्य साम्राज्य की स्थापना और चंद्रगुप्त मौर्य को राज्यपद पर आसीन करने में उनकी महती भूमिका रही।
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भारतीय इतिहास आचार्य चाणक्य के प्रवेश के साथ ही एकदम अँधकार से प्रकाश में आ जाता है। मौर्य काल के बाद भारतवर्ष छोटे-छोटे जनपदों से उभरकर एक विशाल एवं सशक्त साम्राज्य के रूप में स्थापित हो गया। दुराचारी नंदवंश के विनाश, मौर्य साम्राज्य की स्थापना एवं चंद्रगुप्त मौर्य को राज्यपद पर आसीन करने में आचार्य चाणक्य की महती भूमिका रही। नवोदित मौर्य साम्राज्य के प्रधान अमात्य के पद पर रहते हुए, उन्होंने पाटलिपुत्र एवं मौर्य साम्राज्य की सफल प्रशासनिक, न्यायिक, सैनिक एवं आर्थिक व्यवस्था कायम की, जो आगे आने वाले सभी साम्राज्यों की राह प्रशस्त करती रही। इस तरह यदि आचार्य चाणक्य को युगपुरुष की संज्ञा दी जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इस उपन्यास में ऐतिहासिक घटनाओं के साथ- साथ युगपुरुष आचार्य चाणक्य की विचारधाराओं को अभिव्यक्ति करते हुए, उनकी मानसिकता को उजागर करने का प्रयत्न किया है। हाँ, उनके कुछ विचारों का विश्लेषण, आज की समस्याओं के संदर्भ में किया है। यह आवश्यक भी है, वरना इतिहास या चाणक्य जैसे महान ऐतिहासिक व्यक्ति के अध्ययन का कोई लाभ नहीं होगा।
उस समय आर्यभूमि (भारतभूमि) छोटे-छोटे जनपदों में बँटी हुई थी, जिसके शासक हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। उनमें आपसी सहयोग भावना नगण्य थी और वैमनस्य भावना भरपूर। अहंकार और विलासिता से दिन-प्रतिदिन उनका अधोपतन हो रहा था। अपनी समकालीन राजनैतिक परिस्थितियों से युगपुरुष आचार्य चाणक्य बहुत चिंतित थे। एकांत के क्षणों में प्रायः वे विचार करते- “यदि हिमालय से समुद्रपर्यन्त जो सहस्त्र योजन विस्तीर्ण भूमि है, वह एक चक्रवर्ती साम्राज्य का क्षेत्र होकर एक ही शासक की अधीनता में रहे, तो आर्यभूमि पर कभी कोई आँख उठाकर भी नहीं देख सकेगा। चक्रवर्ती साम्राज्य की स्थापना के पश्चात् छोटे-छोटे अनगिनत जनपदों के आधारहीन झगड़े एवं उनके आपसी वैमनस्य का अंत हो जाएगा।”
दृढ़प्रतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति- कुशलता, अतुल्य दृढ़प्रतिज्ञा, बुद्धिबल, क्षमता एवं योग्य शिष्य चंद्रगुप्त के सहयोग से ‘भारत का राजनैतिक एकीकरण’ जैसे अपने इस महान स्वप्न को साकार कर दिखाया।
| Weight | 300 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 1.5 cm |
| Genre |















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