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₹80.00 Original price was: ₹80.00.₹64.00Current price is: ₹64.00.निर्मला मुंशी प्रेमचंद का एक सशक्त सामाजिक उपन्यास है, जो दहेज प्रथा, बेमेल विवाह और नारी जीवन की पीड़ा को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करता है। यह उपन्यास स्त्री की सामाजिक स्थिति और मानसिक संघर्ष को गहराई से उजागर करता है।
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00. -
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00. -
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.गोदान मुंशी प्रेमचंद का सर्वश्रेष्ठ यथार्थवादी उपन्यास है। इसमें भारतीय किसान जीवन, गरीबी, शोषण और सामाजिक अन्याय का मार्मिक चित्रण किया गया है। यह उपन्यास किसान होरी और उसकी पत्नी धनिया के संघर्ष के माध्यम से ग्रामीण भारत की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है।
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00. -
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.प्रेम की उदात्तता और आध्यात्मिक संवेदना की कोमल कथा। यह उपन्यास किशोरावस्था से विकसित होते प्रेम के पवित्रतम रूप को दर्शाता है, जो भौतिक धरातल से उठाकर आध्यात्मिक स्तर तक ले जाता है और ब्रह्मानंद सहोदर बन जाता है।
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₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.प्रेमचंद का यह कालजयी उपन्यास मानवीय लोभ, सामाजिक विडंबनाओं और मध्यमवर्गीय जीवन के जटिल ताने-बाने को उजागर करता है। यह अपने पात्रों के माध्यम से आकांक्षाओं और नैतिक पतन की मार्मिक कहानी कहता है, जो आज भी प्रासंगिक है।
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.जयशंकर प्रसाद का ‘कंकाल’ देश की सामाजिक और धार्मिक स्थितियों का यथार्थ चित्रण करने वाला उपन्यास है। यह मध्यमवर्गीय जीवन की विसंगतियों, स्त्रियों की दयनीय स्थिति और तत्कालीन समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को मार्मिकता से उजागर करता है।
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.जयशंकर प्रसाद का यह उपन्यास ग्रामीण जीवन की समस्याओं, सामंती शोषण और धार्मिक पाखंड का यथार्थवादी चित्रण करता है। यह प्रेम, विवाह और सामाजिक विषमताओं जैसे सवालों पर विचार करते हुए मानवीय संबंधों पर आधारित एक आदर्श समाज का सपना देखता है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.यह उपन्यास “किराए की कोख” के माध्यम से युगीन सत्यों और स्वार्थ-परार्थ के बीच की कशमकश पर करारा व्यंग्य करता है। यह बदलती सामाजिक मानसिकता, नारी शोषण और मानवीय आकांक्षाओं की विडंबनाओं को मार्मिकता से उजागर करता है।
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.SevaSadan प्रेमचंद का उपन्यास ‘सेवासदन’ भारतीय समाज में महिलाओं की दयनीय स्थिति, भ्रष्टाचार और सामाजिक कुरीतियों का मार्मिक चित्रण करता है। यह कृति एक युवा महिला के संघर्षों और सामाजिक दबावों को दर्शाती है, जो उसे एक वेश्यालय में ले जाते हैं, लेकिन अंततः वह समाज सेवा के माध्यम से मुक्ति पाती है। यह उपन्यास सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्यों की स्थापना का सशक्त संदेश देता है।
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₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.Mile Sur Mera Tumhara मनमोहन सहगल का उपन्यास ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ आँचलिकता की गंध में लिपटी वर्तमान समाज की संकीर्णताओं का यथार्थ दस्तावेज है। यह पंजाब में प्रवासी मजदूरों के आयात, नशे की लत, कन्या भ्रूण हत्या, और आतंकी साया जैसे ज्वलंत मुद्दों को उजागर करता है, साथ ही पंजाबियों की उदारता, परिश्रम, सम-भाव, और संबंधों की मिठास को दर्शाते हुए ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, सुर बने हमारा’ का विराट संदेश देता है।
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.Satyapath यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ का उपन्यास ‘सत्यपथ’ उनके पूर्ववर्ती उपन्यासों का आदर्शमूलक विस्तार है, जिसमें स्वतंत्र भारत के जीवन में आए बहुआयामी परिवर्तनों का विशद् रेखांकन किया गया है। उपन्यास का नायक गंगेश नये भारत के निर्माण के आधार सूत्रों का कर्णधार है, जो सर्वत्र सत्य का पक्ष लेता है और अपनी रोचक शैली से पाठक के मन में आदर्शों के प्रति गहरी आसक्ति उत्पन्न करता है।
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₹200.00 Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.Ghar Apana-Apana शशिभूषण सिंघल का उपन्यास ‘घर अपना-अपना’ भारतीय घरों की पहचान और उनकी पारिवारिकता को दर्शाता है, जो टूट-फूट के बाद भी बनी हुई है। यह कृति गिरीश बाबू के बेटे राजीव के ऑस्ट्रेलिया जाने, बेटी सुलक्षणा के आत्मनिर्भर बनने, और अशोक के माता-पिता के साथ रहने जैसे विविध पारिवारिक रूपों को रोचक शैली में प्रस्तुत करती है, जहाँ बिखरे-सँवरते घरों की कशमकश में आदमी से आदमी के जुड़ने का संदेश है।
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₹400.00 Original price was: ₹400.00.₹360.00Current price is: ₹360.00.Sanjh Ho Gayi तेजपाल चौधरी का उपन्यास ‘सांझ हो गई’ मानव सेवा के मूल मंत्र ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ पर आधारित एक प्रयोग है। यह कृति ‘स्व’ के विस्तार की कथा है, जो व्यक्तिगत प्यार से अहंकार की बजाय मानव मात्र से प्रेम की ओर ले जाती है, जिससे सेवा सहज वृत्ति बन जाती है। यह बुजुर्ग पीढ़ी की पीड़ा और वर्तमान विसंगतियों के बीच पाठक को नया आस्वाद और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता देती है।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹225.00Current price is: ₹225.00.Aao Laut Chale तेजपाल चौधरी का उपन्यास ‘आओ लौट चले’ प्रवाह के विरुद्ध तैरने का साहसिक प्रयास है, जिसका केंद्रीय स्वर जीवन की भव्यता और उदात्तता से जुड़ा है। यह कृति समर्पित अध्यापक, निष्ठावान पत्रकार, प्रतिबद्ध समाज सेवक और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस ऑफिसर जैसे पात्रों के माध्यम से मरुभूमि में ऑयसिस-सी शीतलता की अनुभूति कराती है, जो सर्वथा काल्पनिक नहीं हैं।
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₹350.00 Original price was: ₹350.00.₹315.00Current price is: ₹315.00.Suraj Phir Ugega तेजपाल चौधरी का उपन्यास ‘सूरज फिर उगेगा’ एक साहसिक फंतासी है जो समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अमीर-गरीब की खाई और अंधी आर्थिक स्पर्धा को उजागर करती है। यह अहिंसा, अपरिग्रह और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांतों की व्यावहारिकता को रेखांकित करते हुए पाठकों को आत्मचिंतन पर विवश करती है, जिससे वे अपने ही जीवन का प्रतिबिंब देख सकें।