₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
पंडित राजेन्द्र शंकर भट्ट द्वारा रचित ऐतिहासिक कृति ‘मेवाड़ के महाराणा और शाहंशाह अकबर’ स्वाधीनता, शौर्य और स्वाभिमान के अमर इतिहास का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा श्रीमान भगवत सिंह मेवाड़ के प्राक्कथन से सुशोभित यह पुस्तक दर्शाती है कि मेवाड़ का संघर्ष किसी एक राजघराने का नहीं, बल्कि स्वधर्म और आज़ादी की रक्षा के लिए समूचे समाज के सामूहिक आत्मोत्सर्ग की गौरवगाथा है।
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
21वीं सदी हिन्दी साहित्य की दुनिया में अनेक विमर्शों पर लगातार चिंतन और मनन हो रहा है। अनेक कहानियों, उपन्यासों कविताओं में जो जीवन के व्यापक अनुभवों को साहित्य में निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं इससे साहित्य में अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई। वर्तमान में प्रमुख विमर्श हैं स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, थर्ड…
₹400.00Original price was: ₹400.00.₹320.00Current price is: ₹320.00.
राजस्थान के आधुनिक इतिहासकारों में मुन्शी देवी प्रसाद का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इतिहास के क्षेत्र में उसका एक अनन्य योगदान मध्यकालीन फ़ारसी के ऐतिहासिक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद है। वर्तमान समय में उसके द्वारा अनुदित ग्रन्थों में खानखानानामा, जहाँगीरनामा, शाहजहाँनामा एवं औरंगज़ेबनामा ग्रन्थ उपलब्ध हैं। तब फ़ारसी से अनभिज्ञ गौरीशंकर हीराचन्द ओझा आदि इतिहासकारों ने…
₹750.00Original price was: ₹750.00.₹600.00Current price is: ₹600.00.
There has been a tradition of patronage of arts in Mewar, born and bred in Mewar and has descended from generation to generation. The seed-time goes almost to pre-historical times. Mewar, since ancient times has been a centre of high-quality paintings. The book ‘Changing Phases of Mewar Painting’ provides an analytical description of the paintings…
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
ख़यालों का आईना’ जीवन, समाज और रिश्तों के एहसासों को समेटे कविताओं, नज़्मों और शेरों का एक दिलकश संग्रह है। आम बोलचाल की सहज हिन्दी-उर्दू में रची गई ये कविताएँ जीवन के संघर्षों, कोरोना काल की चुनौतियों और अपनों के संबल को सीधे दिल तक पहुँचाती हैं।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
प्रस्तुत पुस्तक में प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन काल में राज्य-राजनीति के निर्धारक तत्त्वों, राष्ट्रीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में राज्य-राजनीति के उभरते स्वरूप, राज्य- राजनीति की दिशा तथा दशा तथा इसकी उभरती प्रवृत्तियों का समीक्षात्मक विश्लेषण किया गया है।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
1980 ई. के लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में श्रीमती इन्दिरा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस (इं) को दो-तिहाई बहुमत प्राप्त हुआ। प्रस्तुत पुस्तक में इसके बाद से लेकर 1984 ई. की अवधि अर्थात् श्रीमती इन्दिरा गाँधी के प्रधानमंत्रित्व काल के द्वितीय चरण तक की अवधि में, राज्यों की राजनीति के विविध पहलुओं पर वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक प्रकाश डाला गया है। श्रीमती इन्दिरा गाँधी की हत्या के साथ राष्ट्रीय तथा राज्य राजनीति के एक युग का अवसान हो गया।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
प्रस्तुत पुस्तक में जनता पार्टी के अभ्युदय, उसकी राज्यवाद स्थिति, जनता पार्टी की विजय तथा केन्द्र में सत्ता-परिवर्तन, राज्यों में मतदाताओं का मतदान- व्यवहार, जनता पार्टी सरकार द्वारा, राष्ट्रपति शासन की अधिसूचना के माध्यम से कांग्रेस शासित राज्य सरकारों की बर्खास्तगी, राज्य विधानसभाओं के चुनाव, राज्यों में केन्द्र समर्थित राज्य सरकारों को अविर्भाव, राज्यों में जनता पार्टी में सत्ता-संघर्ष तथा मुख्यमंत्रियों को विश्वास मत प्राप्त करने का निर्देश, जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों की कार्य-शैली, केन्द्र में जनता पार्टी सरकार का पतन, जनता (एस) सरकार का सत्ता में आना, विश्वास मत की शर्त, चरणसिंह सरकार का पतन, राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा को भंग कर के मध्यावधि चुनाव कराने का निर्णय तथा मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस (इं) की सत्ता में वापसी इत्यादि पहलुओं का सांगोपांग विश्लेषण किया जा रहा है।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
प्रस्तुत पुस्तक में 1971 ई. के लोकसभा के मध्यावधि चुनाव से लेकर 1977 ई. लोकसभा चुनाव परिणामों तक राज्य-राजनीति का जो स्वरूप उभरा, उसका वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक विवेचन किया गया है।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
1967 ई. के चतुर्थ आमचुनाव का भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में अपूर्व महत्त्व है। इसने राज्यों में कांग्रेस के एकाधिकार को समाप्त किया। अनेक राज्यों में गैरकांग्रेसी सरकारें सत्ता में आई। लेकिन ये सरकारें अस्थिरता का पर्याय बन गई। 1967 से 1972 ई. के राज्य विधानसभा के चुनाव के पूर्व अवधि तक दलबदल, मध्यावधि चुनाव, राज्यपालों की विवादास्पद भूमिका, राज्यों में राष्ट्रपति शासन, राज्यों की उथल-पुथल की राजनीति की प्रवृत्तियों के रूप में उभरी। इन सब प्रवृत्तियों का वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक वर्णन किया गया है।
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
स्वतंत्रता के बाद में, भारत में नवीन संविधान लागू किया गया। इसके बाद, देश में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। इसके तहत् देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन व्यवस्था को अपनाया गया। प्रस्तुत पुस्तक में प्रथम आमचुनाव से लेकर चतुर्थ आमचुनाव के पूर्व तक की राज्य-राजनीति की दिशा और दशा का वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
गाँधीजी को मानवाधिकारों का प्रवर्तक कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानवता और मानव के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया था। गाँधीजी अपने प्रारम्भिक जीवन से रंगभेद, उपनिवेशवाद और गैर बराबरी मिटाने के लिए सतत् रूप से कार्य करते रहे। मानव अधिकार अक्षुण्ण हैं, उनका हनन गाँधीजी अनुचित मानते रहे। उनका…
₹500.00Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
सुनील कुमार शर्मा द्वारा रचित शोध-ग्रंथ ‘पाली जिले में औद्योगिक विकास एवं पर्यावरण – समस्या और समाधान’ राजस्थान के पाली जिले में हुए औद्योगिक विस्तार और उसके पर्यावरणीय प्रभावों का तथ्यात्मक भौगोलिक अध्ययन प्रस्तुत करता है। प्रामाणिक आंकड़ों, सारणियों और रेखाचित्रों से समृद्ध यह पुस्तक तीव्र औद्योगिकीकरण से उत्पन्न प्रदूषण की चुनौतियों का विश्लेषण करते…
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹560.00Current price is: ₹560.00.
जयकांत गुप्ता द्वारा लिखित ‘आर्थिक क्रियाएँ और विकास : एक भौगोलिक विश्लेषण’ आर्थिक गतिविधियों और प्रादेशिक विकास का गहन भौगोलिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। आठ सुव्यवस्थित अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक भूमि-उपयोग, संसाधन-वितरण, अवस्थिति सिद्धांतों और बाज़ारी अर्थव्यवस्था का सटीक विश्लेषण करती है, जो भूगोल और अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
हेतु भारद्वाज द्वारा रचित संस्मरणों का एक सहज और आत्मीय संकलन। आत्मरति और दिखावे से दूर, लेखक ने जीवन के विविध मोड़ों और अनुभवों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है, ताकि वे हर पाठक के अपने अनुभव का हिस्सा बन सकें।
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
मनमोहन सहगल द्वारा रचित एक संवेदनशील लघु उपन्यास, जो भारतीय समाज में हाशिए पर धकेले गए किन्नर समुदाय की मूक पीड़ा और अंतर्द्वंद्व को उजागर करता है। यह पुस्तक पारिवारिक अलगाव, सामाजिक उपेक्षा और संस्थागत विमुखता को रेखांकित करते हुए समाज को संवेदनशीलता और समावेशन का संदेश देती है।
₹800.00Original price was: ₹800.00.₹599.00Current price is: ₹599.00.
मध्यकालीन भारत के इतिहास में लोदी एवं सूर वंश के नेतृत्व में अफगान शासकों ने लगभग एक शताब्दी तक उत्तर भारत पर शासन किया। भारतीय इतिहास की इस महत्त्वपूर्ण अवधि को समझने के लिए समकालीन अफगान इतिहासकारों के लेखन का विशेष महत्व है। यद्यपि इन दोनों अफगान राजवंशों का कोई पूर्ण एवं निर्विवाद समकालीन इतिहास-ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है, फिर भी विभिन्न अफगान इतिहासकारों द्वारा लिखित ग्रन्थ इस काल के राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन के प्रमुख स्रोत हैं।
इस पुस्तक में हसन अली, शेख रिज्कुल्लाह मुश्ताकी, अब्बास खाँ सरवानी, मुहम्मद कबीर, अहमद यादगार, अब्दुल्ला तथा ख्वाजा नियामतुल्ला जैसे प्रमुख अफगान इतिहासकारों के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं इतिहास-लेखन का विस्तृत एवं आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, मुगल इतिहासकार निजामुद्दीन अहमद, अब्दुल कादिर बदायूँनी तथा अबुल फ़ज़ल द्वारा अफगानों के संबंध में व्यक्त विचारों की संक्षिप्त समीक्षा भी सम्मिलित की गई है।
मध्यकालीन भारतीय इतिहास, इतिहास-लेखन (Historiography) तथा ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों एवं इतिहास के अध्येताओं के लिए यह पुस्तक एक उपयोगी एवं प्रामाणिक संदर्भ ग्रन्थ है।
₹350.00Original price was: ₹350.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
For over two centuries, social thinkers have strived to study society with the same scientific rigor, empirical depth, and universal truth found in the natural sciences. “Social Thinkers” offers a brilliant, accessible entry point into the fundamental and original ideas that shaped this journey.
This book provides a comprehensive, critical evaluation of the three towering giants of classical western sociology:
Karl Marx: Dive deep into his historical approach, dialectical materialism, theories of class struggle, and social change.
Emile Durkheim: Explore his groundbreaking concepts of social facts, the division of labor, and his landmark study on suicide, explained in lucid, elegant language.
Max Weber: Unpack his detailed theories on the ideal type, social action, bureaucracy, and the sociology of religion.
Perfect for students, researchers, and curious readers alike, each profile begins with an intimate life portrait and a review of their major works, tracking the intellectual influences that shaped their genius.
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प्रस्तुत नाट्यकृति में नौ एकांकियों को सम्मिलित किया गया है। इस संग्रह में छह प्रहसन हैं, जो हमें तनाव और ऊब भरे जीवन से निकालकर मनोरंजन की दुनिया में ले जाते हैं और वहाँ कभी मुसकराने और कभी अट्टहास करने के लिए हमें प्रेरित करते हैं। इन प्रहसनों में विभिन्न सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार…