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Pracheen Bharatiya Vidhi Vyastava

प्राचीन भारतीय विधि व्यवस्था

Author(s): Dr. R.S. Meena
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 240
Edition: First
Published Year: 2001
ISBN: 81-7056-232-5

Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹240.00.

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प्राचीन धर्मशास्त्रीय ग्रंथों (श्रुति, स्मृति एवं मध्यकालीन निबंध) पर आधारित यह पुस्तक प्राचीन भारतीय पारिवारिक एवं साम्पत्तिक विधि के ऐतिहासिक विकास का प्रामाणिक विश्लेषण करती है। इसमें संयुक्त परिवार प्रणाली, पुत्रों के उत्तराधिकार अधिकार और ‘स्त्रीधन’ के विधिक स्वरूप का गहन मूल्यांकन किया गया है, जो भारतीय विधि और इतिहास के शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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प्राचीन भारतीय विधि विश्व की सर्वप्रथम विधियों में से एक है। भारतीय विधि प्रधानतः धर्मशास्त्रीय व्यवस्था पर आधृत रही है। भारत में धर्म की व्यापक परिकल्पना में विधि को उसमें निहित माना जाता था। धर्म से जुड़े होने के कारण प्राचीन युगं में सामाजिक स्थिरता और सभ्यता की विकास-प्रक्रिया में तत्कालीन विधि की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। श्रुति से लेकर स्मृति एवं मध्यकालीन निबन्धकारों तक अनेक ग्रन्थों में प्रादुर्भूत विधि-नियमों से समन्वित प्राचीन भारतीय विधि का अपना एक इतिहास है, जिसमें हमारे व्यवस्थाकारों ने आदर्श स्थापन, न्याय भावना एवं समाज की आवश्यकता के अनुसार जीवन के विविध क्षेत्रों में व्यवस्था प्रदान की है। परिणामस्वरूप प्राचीन भारतीय विधि परम्परा में कतिपय सामाजिक पक्षों का पर्याप्त विकसित रूप प्राप्त होता है। समाज परिवारों से बनता है और प्राचीन भारत में संयुक्त परिवार प्रणाली उस समय के समाज में विशिष्ट स्थान रखती थी। इसलिए पारिवारिक सम्पत्ति से सम्बन्धित विधि-विधान अधिक विकसित हुए। इसलिए प्रस्तुत पुस्तक साम्पत्तिक विधि के विकास पर केन्द्रित है। हमारे प्राचीन विधि ग्रन्थ अर्थात् धर्मशास्त्र इस दृष्टि से अत्यधिक समृद्ध हैं। इन ग्रन्थों का मूल स्रोत सामग्री के रूप में उपयोग करते हुए साम्पत्तिक विधि का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रयास में मूलभूत अवधारणाओं और व्यवस्थाओं का सम्यक् मूल्यांकन प्रस्तुत पुस्तक की निजी विशेषता है। प्राचीन परिवार में पुत्र का महत्त्व सुविदित है। इसलिए पुत्रों के प्रकार एवं उनके साम्पत्तिक अधिकार के साथ-साथ स्त्री धन के सम्बन्ध में पृथक् रूप से सविस्तार विचार किया गया है। इस दृष्टि से भारतीय समाज और विशेष रूप से पारिवारिक सम्पत्ति सम्बन्धी विधि के अध्ययन के लिए यह कृति उपयोगी है।

Weight425 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm

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About the Author

Dr. R.S. Meena

डॉ. आर.एस. मीना प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं विधिशास्त्र के प्रतिष्ठित इतिहासकार, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर (इतिहास) पूर्ण करने के उपरांत ‘विष्णु पुराण में राज्य व्यवस्था’ पर एम.फिल. तथा ‘प्राचीन भारत…

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