“Prachin Bharat Ka Itihas (78-650)” has been added to your cart.
View cart
Showing all 8 resultsSorted by popularity
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
किसी भी सुदृढ़ साम्राज्य की सततता के लिए स्थायी, दृढ़ और जनकल्याण उत्प्रेरक नीतियों की स्थापना अनिवार्य प्रक्रिया है। दूरदर्शी अकबर ने मुगल साम्राज्य को जो राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव प्रदान किया था वह औरंगजेब और उसके उत्तराधिकारियों के युग में धराशायी हो गया। मुगलों में उत्तराधिकार की स्थायी और निश्चित परम्परा न होने से…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मुगलों के पतन के पश्चात् एक शताब्दी का इतिहास तीन शक्तियों-मराठा, उत्तर मुगल और अंग्रेज के मध्य सत्ता संघर्ष का इतिहास है। अट्ठारहवीं शताब्दी में अब्दाली के आक्रमण और मुगल अमीरों और सामन्तों के पारस्परिक झगड़ों के कारण मुगल साम्राज्य का अखिल भारतीय स्वरूप समाप्त हो गया। वह केवल दिल्ली का राज्य मात्र रह गया।…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
इतिहासकारों के अथक् प्रयत्नों से प्राचीन भारत का राजनीतिक इतिहास, मूल स्त्रोतों के क्षीण होते हुए भी, अब स्थूल आकार-प्रकार में रेखांकित किया जा सकता है। हड़प्पा सभ्यता की अन्वेषण से वैदिक साहित्य के अर्थ पर नया प्रकाश पड़ा है। अभिलेखों ने कलियुग की पौराणिक वंशावलियों की सत्यता का समर्थन किया है। पौराणिक इतिहास वैदिक…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
1920 के बाद का भारतीय इतिहास गांधीवादी युग से सम्बन्धित है। इस युग में गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों के अनुसार ही राष्ट्रीय आन्दोलन प्रगतिमान हुआ। भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन गांधीजी की उपलब्धियों का इतिहास है। गांधीजी के पूर्व विश्व में सशस्त्र क्रान्ति ही स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक मात्र मार्ग माना जाता था। गांधीजी ने इस…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मुगल सम्राटों में बाबर से लेकर शाहजहां तक का युग मुगल साम्राज्य के उत्थान के रूप में स्मरण किया जाता है। मुगल सम्राट्-बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहांगीर और शाहजहां में अकबर को छोड़कर शेष सम्राट् बहुत अधिक बुद्धिमान या दूरदर्शी नहीं थे। बाबर और हुमायूँ तो इस देश की भूमि से जुड़ ही नहीं पाये। भारत…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
मध्यकालीन भारतीय इतिहास फारसी क्रोनिकल्स के द्वारा प्रगट होता है। इन ग्रन्थों के विवरण मुस्लिम विजेताओं का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। जिसे बहुत से इतिहासकारों ने अपरीक्षित रूप से दोहरा दिया है। सल्नतकाल के राजनीतिक इतिहास के विषय में भी यह सत्य है। मध्यकालीन इतिहास का सल्तनत युग राजनीतिक दृष्टि से नितान्त प्रभावहीन था। न…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
सातवीं शताब्दी में वर्द्धन साम्राज्य के पतन के पश्चात् से लगभग ग्यारहवीं शताब्दी के प्रारम्भ तक उत्तर भारत में गुर्जर प्रतीहार, चाहमान, चालुक्य, चन्देल, परमार, गहड़वाल, पाल, सेन तथा गंग जैसे अनेक राजवंशों का उदय हुआ जिन्होंने अपनी शक्ति को बढ़ाकर सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अधिकार करने का प्रयत्न किया। इस प्रयत्न में गुर्जर, प्रतीहार…
-
Sale!

₹500.00 Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
कुषाणोत्तर भारतीय इतिहास में गुप्त सम्राज्य का काल केन्द्रीय आकर्षण का युग है। प्रायः भारतीय इतिहास में गुप्तकाल को राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों की दृष्टि से ‘स्वर्ण काल’ और ‘क्लासिकल काल’ आदि नामों से अभिहीत किया जाता है। गुप्त युग के साम्राज्य को चरमोत्कर्ष पर ले जाने के लिए समुद्रगुप्त और चन्द्रगुप्त द्वितीय जैसे सम्राटों…