Ritu Priya Sharma

डॉ. रितुप्रिया शर्मा हिन्दी साहित्य की लेखिका, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् हैं। उनका जन्म 23 जनवरी 1982 को जयपुर, राजस्थान में हुआ। उन्होंने एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं।

साहित्य सृजन के क्षेत्र में उनकी सक्रिय उपस्थिति रही है। उनकी कहानियाँ, लेख तथा बाल साहित्य से संबंधित रचनाएँ देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। मानवीय संवेदनाओं पर आधारित उनका लेखन सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों एवं समकालीन चिंतन को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।

कहानी लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देते हुए पाठ्य-पुस्तक मण्डल, राजस्थान द्वारा उन्हें दो बार सम्मानित किया गया है। उनकी चर्चित कृति गाँधी और मानवाधिकार विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसमें गांधीवादी विचारों और मानवाधिकारों के संबंध का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

बाल साहित्य के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है तथा उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। समकालीन हिन्दी साहित्य से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से साहित्यिक जगत में विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

शोध, लेखन एवं साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से डॉ. रितुप्रिया शर्मा हिन्दी साहित्य, गांधी चिंतन एवं बाल साहित्य के क्षेत्र में निरंतर योगदान देती रही हैं। उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता, वैचारिक गहराई और सामाजिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

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    संवेदनहीनता से जड़ होती जिन्दगी की असंगत धारणाओं को कहानियों में पिरोने का एक सफल प्रयास है यह संकलन। सभी कहानियाँ देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पा चुकी हैं। भाषा में प्रवाह होने से पठनीयता का दायरा बढ़ा है। लेखिका का अनुभव क्षेत्र बड़ा होने से कहानियों का कथ्य भी नयेपन के साथ आया…

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