Vishv ke rochak swajati Bhakshi Jeev
विश्व के रोचक स्वजाति भक्षी जीव
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Vishv ke rochak swajati Bhakshi Jeev विश्व में पाई जाने वाली लगभग 140 स्वजाति भक्षी जीवों की जातियों और उपजातियों का सचित्र परिचय। डॉ. परशुराम शुक्ल द्वारा लिखित यह पुस्तक मानव में असामान्य समझे जाने वाले इस व्यवहार को जीवों के लिए सामान्य व्यवहार के रूप में प्रस्तुत करती है, जो शिकारी जीवों में भोजन की कमी या गलती से उत्पन्न होता है।
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विश्व में जीव-जन्तुओं की लगभग 140 ऐसी जातियाँ और उपजातियाँ पायी जाती हैं, जो स्वजाति भक्षी होती हैं। ये जीव जमीन पर रहते हैं और पानी में भी। नदियों में ये अधिक संख्या में पाये जाते हैं। मानव में स्वजाति भक्षण को एक असामान्य व्यवहार समझा जाता है, जबकि स्वजाति भक्षी जीवों का यह सामान्य व्यवहार है तथा इससे इन्हें कुछ लाभ भी होते हैं।
स्वजाति भक्षण निम्न रीढ़धारी जीवों और अरीढ़धारी जीवों में अधिक देखने को मिलता है, किन्तु यह आवश्यक नहीं है। यह व्यवहार पानी के निकट रहने वाले चूहे जैसे जीव (बैंक वोल्स) से लेकर सिंह तक में पाया जाता है। वास्तव में जब कोई शिकारी जीव किन्हीं कारणों से अथवा भूल से अपनी ही जाति के जीव को अपना शिकार समझ लेता है तो स्वजाति भक्षण की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार का व्यवहार पक्षियों में भी भोजन की कमी के कारण देखा जा सकता है।
इस पुस्तक में विश्व में पाये जाने वाले रोचक स्वजाति भक्षी जीवों का सचित्र परिचय दिया गया है।
| Weight | 410 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |
















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