Subodh Hindi Nibandh
सुबोध हिंदी निबंध
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गद्य को कवियों (रचनाकार) की कसौटी कहा जाता है और निबन्ध को गद्य की कसौटी। यद्यपि परीक्षा में परीक्षार्थी निबन्ध न लिखकर लेख लिखता है, परन्तु कहा इसे निबन्ध ही जाता है। आज किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए हिन्दी भाषा एवं साहित्य का ज्ञान आवश्यक होता जा रहा है। इसमें निबन्ध की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हो गयी है; इस कारण विशेष रूप से कि अब परम्परागत विषय के साथ-साथ किसी समकालीन चर्चित विषय पर भी निबन्ध लिखना पड़ जाता है। तात्पर्य यह कि परीक्षा की दृष्टि से अब निबन्ध का क्षेत्र बहुत व्यापक हो चुका है।
ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थी/परीक्षार्थी को समकालीन घटनाओं की व्यापक जानकारी तो हो ही, साथ ही उसकी विषय-वस्तु को निबन्ध के कलेवर में समायोजित करने की उसमें अपेक्षित दक्षता भी हो। लेकिन नूतनंता के आवेग में परम्परागत विषयों का भी तिरस्कार नहीं होना चाहिए। इतना अवश्य है कि अब ये परम्परागत निबन्ध भी नूतन शैली में अपनी प्रस्तुति चाहते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक इसी तथ्य को ध्यान में रखकर लिखी गयी है। इसमें परम्परागत के साथ-साथ साम्प्रतिक परिवेश के बहुचर्चित अनेक ऐसे संदर्भों को चुना गया है जो निबन्ध के रूप में अन्यत्र शायद ही उपलब्ध हो सकें। सामग्री एवं आंकड़ें भी अद्यतन रखने के प्रयास किये गये हैं। भाषा-शैली के सरस एवं रुचिकर कलेवर में ये निबन्ध सहज ही पाठकों के मानस-पटल में स्थापित हो सकें, ऐसा प्रयत्न किया गया है।
| Weight | 280 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |





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