Sanskriti Shiksha aur Cinema
संस्कृति शिक्षा और सिनेमा
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संस्कृति, शिक्षा और सिनेमा के अंतरसंबंधों पर हेतु भारद्वाज के बेबाक आलेखों का संग्रह। यह पुस्तक अपने समय के सवालों, मानवीय संघर्षों और समाज की विसंगतियों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो पाठक को सोचने पर विवश करती है।
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हेतु भारद्वाज ऐसे रचनाकार हैं जो अपने समय के सवालों से अनेक स्तरों पर जूझते हैं। इस जूझन के केन्द्र में जीता-जागता मनुष्य है जो अपने परिवेश से बराबर संघर्ष कर रहा है। चाहे धर्म हो चाहे संस्कृति, हेतु भारद्वाज के लिए मनुष्य से अलग इनका कोई अस्तित्व नहीं है। इसलिए इन आलेखों में उनकी बेचैनी तो दिखती ही है, साथ- साथ सही कहने की क्षमता का भी आभास होता है। जिन सवालों पर लोग या तो बचकर निकलने का प्रयास करते हैं या गोल-मोल कर सवालों से कतराते हैं, वहाँ हेतु भारद्वाज की साफगोई उनके साहस को प्रकट करती है। इसलिए उनकी दृष्टि जैसे विसंगति के आर-पार जाकर एक ऐसा विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिससे आप असहमत हो सकते हैं पर उसे निरस्त नहीं कर सकते। संस्कृति, शिक्षा तथा सिनेमा से सम्बन्धित ये आलेख पाठक को बहस के लिए आमंत्रित करते हैं, उन्हें झकझोरते हैं और सोचने पर विवश करते हैं। आलेखों की भाषा में जो ताजगी है वह इन्हें और प्रभावी एवं पठनीय बना देती है। इन आलेखों में उठाये गये सवाल हमारे अपने हैं, इसलिए पाठक को उनसे रू-ब-रू होने का अवसर देते हैं। वे शिक्षक रहे हैं अतः शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं पर वे बहुत बेबाक हो जाते हैं। वैसे बेबाकी उनके लेखन का स्थायी तत्त्व है।
| Weight | 300 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |
















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