Saiddhantik Samajshastra
सैद्धान्तिक समाजशास्त्र
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Saiddhantik Samajshastra समाजशास्त्र विषय शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण सामाजिक विज्ञान के रूप में स्थापित हो गया है। वीरेंद्र प्रकाश शर्मा की यह पुस्तक ‘सैद्धान्तिक समाजशास्त्र’ समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य के अनुसार मानव समाज के विभिन्न पक्षों एवं आयामों का व्यवस्थित ज्ञान प्रदान करती है। यह समाजशास्त्र की महत्वपूर्ण अवधारणाओं, संस्थाओं, कार्यविधियों, तथ्यों, और सिद्धांतों का मौलिक ज्ञान प्रदान करती है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं, और प्रतियोगियों के लिए उपयोगी है।
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विगत वर्षों में समाजशास्त्र विषय शिक्षा जगत में एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक विज्ञान के रूप में स्थापित हो गया है। इसकी एक शाखा सैद्धान्तिक समाजशास्त्र समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य के अनुसार मानव समाज के विभिन्न पक्षों एवं आयामों का व्यवस्थित ज्ञान प्रदान करता है।
समाजशास्त्र के सभी विद्यार्थियों स्नातक, स्नातकोत्तर, शोधकर्ताओं तथा प्रतियोगियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें समाजशास्त्र से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण अवधारणाओं, संस्थाओं और उनकी कार्यविधियों, तथ्यों, सिद्धान्तों आदि का मौलिक ज्ञान हो। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आलोच्य पुस्तक में मानव, समाज, संस्कृति, समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य, सामाजिक क्रिया, सामाजिक व्यवस्था, सामाजिक संरचना, प्रस्थिति एवं भूमिका, अप्रतिमानता, विचलन, अलगाव, सामाजीकरण, सामाजिक नियंत्रण, असमानता, सामाजिक स्तरीकरण, सामाजिक परिवर्तन आदि महत्त्वपूर्ण एवं मौलिक प्रकरणों की विवेचना की गई है।
आज इस विषय की सैद्धान्तिक और व्यावहारिक उपयोगिता एवं आवश्यकता अन्तः- शास्त्रीय अध्ययनों, योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों, अनुसंधान के क्षेत्रों, कल्याण एवं सेवा कार्यक्रमों, विभिन्न प्रशासनिक विभागों तथा शिक्षा जगत में देखी जा सकती है। आशा है प्रस्तुत कृति इन विभिन्न विभागों की व्यावसायिक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतियोगियों, समाजशास्त्र के स्नातकोत्तर, एम.फिल., पीएच.डी. आदि के विद्यार्थियों एवं अन्य सामाजिक विज्ञानों के रुचिशील सुधी पाठकों के लिए उपादेय सिद्ध होगी।
| Weight | 635 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Textbook Genre |
















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