Sagar Vigyan
सागर विज्ञान
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मनुष्य प्राचीनकाल से ही सागरों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिये प्रयासरत रहा है। प्रारम्भिक काल में वैज्ञानिक प्रगति कम होने के कारण सागरों के जैविक परिवेश की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों के विकास से हम सागरों के काफी समीप आ गये हैं। सागरों के बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ पुनर्जागरण काल के उत्तरार्द्ध में प्रकाशित होने लगी थी। इस प्रकार इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भिक दशक तक अनेक जानकारियाँ प्रकाशित हुईं, लेकिन उनमें अधिकांश वैज्ञानिक स्तरीय रही हैं।
प्रस्तुत पुस्तक सागरीय तथ्यों एवं सम्पूर्ण परिवेश के बारे में एक सामान्य विवरण प्रस्तुत करती है, जिसमें सागर विज्ञान के विकास, व्याख्या तथा खोज यात्राओं का विवरण, सागरीय विस्तार, सागरीय जल की गुणवत्ता एवं मात्रा, सागरीय संसाधनों, जलीय परिवहन तथा सागरों में हो रहे प्रदूषण की विस्तृत विवेचना सम्मिलित की गई है।
इस पुस्तक की रचना में सरल एवं सुबोध भाषा का प्रयोग कर आम व्यक्ति के लिए रुचिकर बनायी गयी है। यह पुस्तक आम व्यक्ति के साथ ही सागरीय विषयों में शोध कर रहे शोधकर्ताओं, लेखकों, प्राध्यापकों व नियोजनकर्ताओं के लिये अनुपम कृति सिद्ध होगी।
| Weight | 315 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |















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