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Ravindranath Tagore ki Shresth Kahaniyan

रवीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियाँ

Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 182
Edition: Third, 2011
Published Year: 2006
ISBN: 81-902169-9-6

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

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रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्व के उन विरल रचनाकारों में हैं जिनमें व्यक्तित्व और साहित्य का अद्भुत सामंजस्य मिलता है। टैगोर के व्यक्तित्व को देखकर ही लगता था कि साहित्य की व्यापकता सिमटकर उनमें मूर्त हो गयी है। उन्हें ‘गीतांजलि’ नामक कृति पर नोबेल पुरस्कार मिला, जिससे उनकी ख्याति सारे विश्व में फैल गयी। यदि यह पुरस्कार न भी मिलता तब भी उनकी महानता कम नहीं होती क्योंकि वे क्षुद्र लगने वाले मानव की महामानवता के वैतालिक थे।

वे साहित्य के सागर हैं क्योंकि उन्होंने कितने ही उपन्यास लिखे, कितनी ही कहानियाँ लिखीं, कितने ही महाकाव्यों की रचना की, असंख्य गीतों का सृजन उन्होंने किया, उन्होंने अनेक शैलियों का प्रयोग किया, अनेक छंदों का प्रयोग किया, उन्होंने मनुष्य की असंख्य छवियों का अंकन किया, अनेक साहित्य रूपों में स्वयं को अभिव्यक्त किया। उनका रचनाकर्म इतना विपुल है कि उसे पढ़ने के लिए भी एक जिन्दगी चाहिए।

मनुष्य की महानता की उन्होंने केवल कल्पना ही नहीं की प्रत्युत अथक अन्वेषण कर उसे अपनी रचनाओं में सिद्ध भी किया है विशेष रूप से अपनी कहानियों में। इसीलिए जन साधारण की चर्चा में वे साहसपूर्वक घोषणा करते हैं, ‘मुझे जन तो बहुत मिले पर साधारण कोई नहीं मिला।’ उनकी कहानियाँ इसी साधारण की खोज का प्रयास करती हैं। उनकी कहानियों का फलक समूची मनुष्यता को समेटता है और पाठक को उसकी महानता का अहसास करा देता है। उनका ‘पोस्ट मास्टर’ एक व्यक्ति मात्र नहीं है वह मनुष्यता का प्रतीक है। उनके ‘हेमू’ की पीड़ा नारी जाति की वेदना का ही विस्तार है तो ‘काबुलीवाला’ की करुणा सारे विश्व

Weight320 g
Dimensions22 × 15 × 2 cm
Genre

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About the Author

Ravindranath Thakur

रवीन्द्रनाथ ठाकुर (7 मई 1861 – 7 अगस्त 1941), जिन्हें आदरपूर्वक ‘गुरुदेव’ कहा जाता है, विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक, नाटककार, चित्रकार एवं संगीतकार थे। वे साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार (1913) से सम्मानित होने वाले पहले गैर-यूरोपीय और प्रथम…

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