Rajbhasha Hindi Ka Manak Swaroop
राजभाषा हिंदी का मानक स्वरूप
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14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि भारतीय गणराज्य की राजभाषा, देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। इसके बाद इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति ने 1952, 1955 तथा 1960 में तीन आदेश जारी किए तथा 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित किया गया, जिसका संशोधन 1967 में हुआ तथा 1968 में एक संकल्प तथा 1976 में राजभाषा नियम बने। उनकी पूर्ण जानकारी इस इस पुस्तक में दी गई है। यद्यपि संविधान में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया है तथापि व्यावहारिक रूप से अभी भी हिन्दी का नियमानुकूल अपेक्षित प्रयोग नहीं हो रहा है। हिन्दी के राजभाषा के रूप में प्रयोग के सम्बन्ध में व्यावहारिक रूप से आने वौली कठिनाइयों की जानकारी इस पुस्तक में दी है। यह पुस्तक राजभाषा से जुड़े सभी विषयों पर सम्यक् प्रकाश डालती है तथा इस प्रसंग में उठने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान भी सुझाती है।
लेखक ने इस कृति में राजभाषा हिन्दी से सम्बन्धित कतिपय नये विषयों पर भी संदर्भ जोड़े हैं। हिन्दी शब्द-समूह विवेचन तथा देवनागरी लिपि के विकास, प्रयोग तथा उसमें संशोधनों की विशद् चर्चा की गयी है। इस पुस्तक में लेखक ने राजभाषा से सम्बन्धित नीति व समस्याओं के साथ हिन्दी भाषा के विकास की रूपरेखा भी प्रस्तुत की है।
| Weight | 310 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |





Rajbhasha Hindi Ka Manak Swaroop
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