Rajasthn ke Sanskritik Lokgeet
राजस्थान के सांस्कृतिक लोकगीत
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Rajasthn ke Sanskritik Lokgeet लोक-साहित्य में लोकगीतों का विशिष्ट स्थान है, जिनके पीछे एक समृद्ध संस्कृति है। लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत का यह संग्रह गर्भावस्था से लेकर विवाह, विदा, गृहस्थ जीवन और दाम्पत्य सुख-दुःख तक के मानवीय पहलुओं पर मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक राजस्थान के लोकगीतों को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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लोक-साहित्य में लोकगीतों का अपना एक विशिष्ट स्थान है, उनका अपना समाज में एक महत्त्व है। इनके पीछे एक संस्कृति है जिसकी झाँकी कदम-कदम पर लोकगीतों में होती है। विशेषकर ये लोकगीत महिलाओं द्वारा रचे गए होते हैं और ज्यादातर उन्हीं के द्वारा गाये जाते रहे हैं। जीवन में इनका अपना प्रभाव पड़ता रहता है। गर्भावस्था से लेकर प्रसव, जन्म, मुंडन, विवाह, विदा, आगमन, प्रस्थान, गृहस्थ जीवन, दाम्पत्य, सुख के क्षण, दुःख की ज्वाला, संयोग, विरह आदि सभी पहलुओं पर एक मार्मिक अभिव्यक्ति की गई है।
यों लोकगीतों पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। परन्तु इनका एक अथाह खजाना बिखरा पड़ा है। इसका थोड़ा-सा अंश ही प्रकाश में आया है। दिन-दिन समय की गति के कारण इनका ह्रास तेजी से हो रहा है। इन्हें सुरक्षित करना आज का बड़ा काम है। मैंने इसी दृष्टि से इस क्षेत्र में कुछ कार्य करने की कोशिश की है। पहले मेरी एक पुस्तक “राजस्थानी लोकगीत” कई वर्षों पहले प्रकाशित हो चुकी है। पाठकों ने इसे बड़ा पसन्द किया। तभी मैंने सोचा पुस्तक रूप में अन्य लोकगीत जो मेरे पास हैं उन्हें गुण-ग्राहकों के समक्ष पेश करूँ।
परन्तु अन्य कार्यों में व्यस्त होने के कारण नहीं कर पाई। अब मैं ‘राजस्थान के सांस्कृतिक लोकगीत’ के नाम से पाठकों के सम्मुख यह प्रस्तुत कर रही हूँ। साथ ही दूसरी पुस्तक “रजवाड़ी लोकगीत” शीघ्र ही प्रेस में देने जा रही हूँ।
केवल इसी उद्देश्य से दोनों पुस्तकों में अपने संगृहीत लोकगीत दे रही हूँ कि जिह्वा पर बिखरे धन को नष्ट होने से बचाया जा सके।
-लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत
| Weight | 290 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 1 cm |
| Genre |





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