Rajasthan ke Rajwadon ka Sanskritik Vaibhav
राजस्थान के रजवाड़ों का सांस्कृतिक वैभव
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Rajasthan ke Rajwadon ka Sanskritik Vaibhav ‘राजस्थान के रजवाड़ों का सांस्कृतिक वैभव’ यहाँ के राजपूत राजपरिवारों के सांस्कृतिक आदर्शों, विशिष्ट जीवन-मूल्यों, और गौरवशाली परंपराओं पर एक मौलिक और शोधपूर्ण अध्ययन है। राघवेन्द्र सिंह मनोहर की यह कृति धर्म और संस्कृति की रक्षा में क्षत्रिय नरेशों के प्रशंसनीय भूमिका को सुंदर और प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है, जहाँ वीरता, त्याग और बलिदान का अद्भुत समन्वय हुआ है।
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राजस्थान के रजवाड़ों का सांस्कृतिक वैभव’ कृति में यहाँ के राजपूत राजपरिवारों के सांस्कृतिक आदर्शों, विशिष्ट जीवन-मूल्यों, सामाजिक रीति-रिवाजों, मान्यताओं तथा सांस्कृतिक परम्पराओं एवम् वैभव पर एक मौलिक और शोधपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इस महत्त्वपूर्ण विषय पर यह अपने ढंग का स्तुत्य प्रयास है।
राजस्थान के राजपूत राज परिवारों व राजघरानों की एक विशिष्ट अभिजात्य संस्कृति रही है जिसकी अपनी निराली आन-बान-शान और एक विशेष संस्कृतिक पहचान है। उदात्त जीवन- मूल्य, प्रेरणास्पद सांस्कृतिक आदर्श एवम् वीरता, त्याग और बलिदान की गौरवशाली परम्पराओं का यहाँ जो अद्भुत समन्वय हुआ है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। लेखक ने इतिहास के आलोक में राजपूत राज परिवारों की सांस्कृतिक परम्पराओं, उनके वीरोचित जीवन-मूल्यों और आदर्शों का गहन विवेचन विश्लेषण करते हुए राजस्थान के रजवाड़ों के सांस्कृतिक परिवेश तथा धर्म एवं संस्कृति की रक्षा में क्षत्रिय नरेशों, जागीरदारों सहित सामान्य राजपूत योद्धाओं की प्रशंसनीय भूमिका को सुन्दर और प्रभावशाली ढंग से उजागर किया है।
राजस्थान वीरता और शौर्य की क्रीड़ास्थली रहा है। यहाँ का इतिहास धरती की पाटी पर लहू से लिखा इतिहास है। यहाँ के प्रत्येक रजवाड़े में ऐसे वीर योद्धा हुए हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए आक्रान्ता शत्रु से दुर्घर्ष संघर्ष कर हँसते-हँसते मृत्यु का आलिंगन किया है। अपना बलिदान देकर उन्होंने महिलाओं के शील सतीत्व तथा स्वधर्म और संस्कृति की अपने माथे का मोल देकर रक्षा की है। ऐतिहासिक घटनाओं और प्रसंगों के सन्दर्भ देते हुए लेखक ने वीरता की गौरवशाली परम्पराओं को रेखांकित किया है।
| Weight | 420 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |





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