Prathmik Vidyalya Me Bhasha Shiksha
प्राथमिक विद्यालय में भाषा शिक्षा
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गांधीजी ने भारत के हर बच्चे के लिए अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का सपना देखा था तथा उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान ‘बुनियादी शिक्षा’ का दर्शन स्थापित कर इस दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया था। लेकिन यह विडम्बना ही कही जाएगी कि इक्कीसवीं सदी के आरम्भ में भारत सरकार शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार कर सबके लिए शिक्षा की अनिवार्यता पर बल दे रही है। ऐसा नहीं कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् शिक्षा के प्रचार-प्रसार के प्रयत्न नहीं हुए, किन्तु अभी भी हमारी जनसंख्या का अधिसंख्य भाग निरक्षर है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार के जो प्रयत्न हुए, उनमें कहीं दृढ़ संकल्प की कमी रह गयी। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संगठनों की मात्रात्मक भागीदारी तो खूब रही किन्तु उनका समाज को न तो गुणात्मक लाभ मिला न सामाजिक-जागरण के रूप में उनका प्रभाव ही परिलक्षित हुआ। धीरे-धीरे इन संगठनों की प्रासंगिकता भी संदिग्ध होती गयी है। दूसरी ओर निजी क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षण संस्थाओं ने शिक्षा का पूरी तरह व्यावसायीकरण. कर दिया है तथा अंग्रेजी के प्रभाव के कारण शिक्षा देशज जड़ों से कटती जा रही है।
इन स्थितियों का दुष्प्रभाव सरकारी प्रयत्नों द्वारा प्रदत्त शिक्षा पर स्पष्ट दिखायी देता है। जनता की आस्था ही सरकारी शिक्षण संस्थाओं से उठती जा रही है तथा माता-पिता अपने बच्चों को ऊँची शुल्क देकर निजी तथा अंग्रेजी माध्यम वाली शिक्षण संस्थाओं में भेज रहे हैं। ऐसे में सार्वजनिक
| Weight | 275 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |









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