Pradushan Niyantran aur Paryavarniya Sajagta
प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय सजगता
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पर्यावरण प्रदूषण के भयानक प्रभावों और नियंत्रण उपायों पर केंद्रित यह पुस्तक, स्वच्छ हवा, जल और धूप के महत्व को रेखांकित करती है। यह पर्यावरण चेतना को आंदोलन स्तर पर विकसित करने और प्रदूषण मुक्त जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देती है।
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मानव जीवन जिन आपदाओं की मार झेल रहा है, उनमें पर्यावरण-प्रदूषण सबसे भयानक आपदा है। मनुष्य का प्रकृति से सान्निध्य निरंतर कम होता जा रहा है। महानगरों तथा नगरों का जीवन इतना नारकीय हो गया है कि वहाँ रहने वाले मनुष्य को शुद्ध हवा, जल तथा धूप तक नसीब नहीं होती। उधर औद्योगीकरण, बढ़ते वाहनों, प्लाटिक के बढ़ते दैनिन्दन प्रयोग से पर्यावरण निरंतर प्रदूषित होता जा रहा है। उधर जनसंख्या के दबाव के कारण खुली जीवन पद्धति का लोप होता जा रहा है। सिविक सैन्स के अभाव में गलियाँ, सड़कें, प्लेटफार्म आदि सार्वजनिक स्थान गन्दगी के ढेर में तब्दील होते जा रहे हैं। इसीलिए नये- नये रोगों के कीटाणु मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने के लिए तत्पर रहते हैं। पर्यावरण की इन विषम परिस्थितियों में जीवन रक्षा के लिए पर्यावरण की रक्षा जरूरी है। पर्यावरण चेतना को अब आन्दोलन स्तर पर विकसित किया जाना चाहिए।
प्रस्तुत कृति पर्यावरण-प्रदूषण से उत्पन्न होने वाली विद्रूपताओं को रेखांकित करते हुए पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त रखने पर बल देती है। साथ ही वह यह भी बताती है कि पर्यावरण को स्वच्छ कैसे रखा जा सकता है और पर्यावरण के प्रति समाज में चेतना को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है? पर्यावरण प्रदूषण से आक्रान्त लोगों के लिए यह एक आवश्यक पुस्तक है।
| Weight | 345 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |






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