Sale!

Pradushan Niyantran aur Paryavarniya Sajagta

प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय सजगता

Author(s): Gopinath KalBhor
Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 174
Publisher: Jyoti Prakashan
Edition: Second, 2005
Published Year: 2000
ISBN: 81-87988-03-7

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

You Save 10%

पर्यावरण प्रदूषण के भयानक प्रभावों और नियंत्रण उपायों पर केंद्रित यह पुस्तक, स्वच्छ हवा, जल और धूप के महत्व को रेखांकित करती है। यह पर्यावरण चेतना को आंदोलन स्तर पर विकसित करने और प्रदूषण मुक्त जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देती है।

In stock

Share:
GUARANTEED SAFE CHECKOUT
  • Visa Card
  • MasterCard

मानव जीवन जिन आपदाओं की मार झेल रहा है, उनमें पर्यावरण-प्रदूषण सबसे भयानक आपदा है। मनुष्य का प्रकृति से सान्निध्य निरंतर कम होता जा रहा है। महानगरों तथा नगरों का जीवन इतना नारकीय हो गया है कि वहाँ रहने वाले मनुष्य को शुद्ध हवा, जल तथा धूप तक नसीब नहीं होती। उधर औद्योगीकरण, बढ़ते वाहनों, प्लाटिक के बढ़ते दैनिन्दन प्रयोग से पर्यावरण निरंतर प्रदूषित होता जा रहा है। उधर जनसंख्या के दबाव के कारण खुली जीवन पद्धति का लोप होता जा रहा है। सिविक सैन्स के अभाव में गलियाँ, सड़कें, प्लेटफार्म आदि सार्वजनिक स्थान गन्दगी के ढेर में तब्दील होते जा रहे हैं। इसीलिए नये- नये रोगों के कीटाणु मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने के लिए तत्पर रहते हैं। पर्यावरण की इन विषम परिस्थितियों में जीवन रक्षा के लिए पर्यावरण की रक्षा जरूरी है। पर्यावरण चेतना को अब आन्दोलन स्तर पर विकसित किया जाना चाहिए।

प्रस्तुत कृति पर्यावरण-प्रदूषण से उत्पन्न होने वाली विद्रूपताओं को रेखांकित करते हुए पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त रखने पर बल देती है। साथ ही वह यह भी बताती है कि पर्यावरण को स्वच्छ कैसे रखा जा सकता है और पर्यावरण के प्रति समाज में चेतना को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है? पर्यावरण प्रदूषण से आक्रान्त लोगों के लिए यह एक आवश्यक पुस्तक है।

Weight345 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Pradushan Niyantran aur Paryavarniya Sajagta”

Your email address will not be published. Required fields are marked *