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Netaji ka Mundan

नेताजी का मुंडन

Language: Hindi
Format: Hardcover
Pages: 200
Edition: First, 2014
ISBN: 978-93-80071-17-6

Original price was: ₹400.00.Current price is: ₹360.00.

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Netaji ka Mundan प्रो. योगेश चन्द्र शर्मा का व्यंग्य संग्रह ‘नेताजी का मुंडन’ देश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में व्याप्त आपाधापी, घोटाले और भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करता है। यह कृति विसंगतियों को अंदर तक उघाड़कर उनकी चीर-फाड़ करती है, हमें कहीं गुदगुदाती है, कहीं हँसाती है, कहीं रुलाती है और कहीं विसंगतियों के विरुद्ध संघर्ष करने का आह्वान करती है।

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देश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में आपाधापी, घोटाले और भ्रष्टाचार की बात हम आये दिन देखते, सुनते और पढ़ते रहते हैं। आम आदमी इन्हें देखकर या तो खामोशी में खो जाता है या बड़बड़ाता-सा अपना नपुंसक क्रोध व्यक्त कर देता है। इसके विपरीत जब व्यंग्यकार समाज की इन विसंगतियों को देखता है तो वह अपनी कलम से उन पर चाशनी में घुला ऐसा तीखा प्रहार करता है, जिससे व्यक्ति तिलमिला कर रह जाता है, लेकिन ऊपर से वह केवल खिसियानी हँसी हँस देता है। विसंगतियों पर तीखा प्रहार करने वाली ऐसी ही व्यंग्य रचनाओं का यह संग्रह प्रस्तुत है, जिसके लेखक योगेशचन्द्र शर्मा, बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। नाटक, कहानी, व्यंग्य, बाल साहित्य, निबन्ध आदि विषयों पर इनकी कलम समान रूप से अपना चमत्कार दिखलाती रही है। विभिन्न विधाओं में इनकी एक दर्जन अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। व्यंग्य के क्षेत्र में यह इनकी दूसरी पुस्तक है। इनका पहला व्यंग्य संग्रह ‘मजबूरियों के घेरे’ राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। अन्य अनेक पुरस्कारों से भी इन्हें सम्मानित किया गया है। अखबारी दुनिया में तो योगेशचन्द्र शर्मा एक बहुचर्चित और बहुप्रकाशित रचनाकार हैं ही।

प्रस्तुत व्यंग्य संग्रह में आज के लगभग सभी ज्वलन्त पहलुओं की अन्दर तक की परतों को उघाड़कर उनकी गहराई से चीर-फाड़ की गयी है। उनकी विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया गया है। ये रचनाएँ हमें कहीं गुदगुदाती हैं, कहीं हँसाती हैं, कहीं रुलाती हैं और कहीं विसंगतियों के विरुद्ध संघर्ष करने का आह्वान करती हैं।

Weight 325 g
Dimensions 22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

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