Manav Evam Arthik Bhugol
मानव एवं आर्थिक भूगोल
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मानव और प्रकृति के परस्पर सम्बन्धों और अन्तर्क्रियाओं से मानव सभ्यता का विकास हुआ है। पर्यावरण के विभिन्न उपादानों का मानव जीवन पद्धति पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए भूगोल विषय का अध्ययन प्राकृतिक उपादानों के सन्दर्भ में मनुष्य को केन्द्र में रखकर किया जाता है। मनुष्य की विकास-यात्रा में आर्थिक संसाधनों का सार्थक हस्तक्षेप आधुनिक युग की देन है। इतना ही नहीं प्राकृतिक संसाधनों के उपायोग में भी आर्थिक हस्तक्षेप अपरिहार्य हो गया है।
वस्तुतः भूगोल का अध्ययन अब प्रकृति और मनुष्य तक ही सीमित नहीं रह गया है, प्रत्युत उनके साथ आर्थिक सम्बन्धों की अनिवार्यता जुड़ गयी है। अब एक स्वतन्त्र अनुशासन के रूप में ‘मानव एवं आर्थिक भूगोल’ विषय को नये सन्दर्भों के साथ मान्यता मिल रही है और इसके व्यापक अध्ययन पर विश्वविद्यालयों में जोर दिया जाने लगा है।
प्रस्तुत कृति इस नये अनुशासन की मूलभूत अवधारणाओं को व्याख्यायित करने के साथ ही मानव भूगोल के विविध रूपों की विवेचना करती है। साथ ही यह कृति उन सारी क्रियाओं का विश्लेषण करती है, जिनमें आर्थिक संसाधनों का उपयोग आवश्यक होता है, जैसे-कृषि, पशुपालन, खनिज, ऊर्जा, विभिन्न उद्योग आदि क्षेत्र। जिन अध्येताओं की मानव एवं आर्थिक भूगोल के अध्ययन में अभिरुचि है, उनके लिए यह एक जरूरी पुस्तक है, क्योंकि उन्हें विषय से सम्बन्धित सभी पक्षों का सम्यक् विश्लेषण यहाँ मिल जाता है।
| Weight | 345 g |
|---|---|
| Dimensions | 21.5 × 14 × 1.5 cm |
| Curriculum | |
| University | Brij Univ. (Bharatpur), JNVU (Jodhpur), Matsya Univ. (Alwar), MDSU (Ajmer), MGSU (Bikaner), MLSU (Udaipur), Shekhawati Univ. (Sikar), University of Kota, University of Rajasthan (Jaipur) |
| Textbook Genre |
















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