Mahila Sashaktikaran
महिला सशक्तिकरण
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Mahila Sashaktikaran प्रियंका माथुर की यह पुस्तक पुरुष प्रधान समाजों में नारी को मिली द्वितीय श्रेणी की नागरिकता पर केंद्रित है। यह नारी सशक्तिकरण के जैविक और मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, विकास प्रक्रिया, सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों, तथा संवैधानिक प्रावधानों की विशद् व्याख्या करती है। यह कृति साइमन द बोउवा और कैट मिलैट जैसी नारीवादी चिन्तकों के प्रभाव को दर्शाती है, जो नारी-जागरण और सशक्तिकरण के आंदोलन की पैरवी करती है।
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विश्व की सभी संस्कृतियाँ पुरुष प्रधान रही हैं, अतः नारी को सर्वत्र द्वितीय श्रेणी की नागरिकता की उपेक्षा मिली। मानव इतिहास की दीर्घ परम्परा में ऐसी अनेक तेजस्वी नारियाँ हुईं, जिनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता है तथापि पुरुष ने नारी को भोग्या वस्तु माना और उसे घर की चहारदीवारी में सीमित रखा। उसे शिक्षा से दूर रखा गया और जो उत्तरदायित्व नारी जीवन के लिए तय किये गये उन्होंने उसे संस्थागत मूल्यों के सहारे आजीवन गुलाम और दुर्बल बनाए रखा।
किन्तु नारी समाज की जीवंत इकाई है तथा उसकी उपेक्षा आधी दुनिया की उपेक्षा है। उसे दुर्बल या अबला मानना नारी का अपमान है। पश्चिम में सिमोन द बोउवा, कैट मिलैट, जर्मन ग्रीयर जैसी नीरीवादी चिन्तकों ने स्त्री सशक्तिकरण के आन्दोलन की पैरवी की जिससे सारे विश्व में नारी-जागरण की चेतना फैल गयी।
नारी जागरण तथा सशक्तिकरण की प्रक्रिया बहुत जटिल है, क्योंकि नारी को सदियों की मानसिक दासता ने पूरी तरह जड़ कर दिया है। इस स्थिति से मुक्ति के लिए नारी जागरण पर जो चिंतन हुआ और उसके लिए जो योजनाएँ बनीं उनका सम्यक् विवेचन इस कृति में हुआ है। विदुषी लेखिका ने इस कृति में नारी सशक्तिकरण के जैविक और मनौवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, नारी सशक्तिकरण की विकास प्रक्रिया, नारी सशक्तिकरण के सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रम तथा उनका मूल्यांकन-विश्लेषण आदि पक्षों का विस्तृत और वस्तुनिष्ठ विवेचन किया है।
| Weight | 270 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |




Coat me Tanga Aadmee
Samajshastra Vishvkosh
Aadhunik Bharat Ka Itihas (1919-1950 E.)
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