Mahila aur Manavadhikar
महिला और मानवाधिकार
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Mahila aur Manavadhikar नारी ने बहुत सहा है, पुरुष के पौरुष मोह जाल में फँसकर सदा ‘शासिता’ रूप में रही है। एम. ए. अंसारी की यह कृति नारी को भोग वस्तु नहीं, बल्कि ‘उत्सव’ और ‘हर्ष’ का कारक मानती है, जो पुरुष के जीवन को पूर्णता देती है। यह पुस्तक नारी के प्रति स्वस्थ और पवित्र दृष्टिकोण अपनाते हुए नारी जीवन से जुड़े सभी सवालों से तर्कपूर्ण ढंग से रूबरू होती है, और नारी-मुक्ति का आह्वान करती है।
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नारी ने बहुत सहा है। पुरुष ने अपने पौरुष मोह जाल में फँसाकर उसको सदा ही ‘शासिता’ रूप में रखा है।
नारी जो पुरुष के जीवन में “महिला” रूप है, उसके साथ सदियों से चला आ रहा पुरुष का उपेक्षणीय व्यवहार अब प्रश्न चिन्हित हो गया है।
पुरुष के संदर्भ में महिला है- ‘महि’ अर्थात् उत्सव और ‘ला’ का अर्थ है जननी अर्थात् ‘महिला ‘वह है, जो पुरुष के जीवन में उत्सव व हर्ष का कारक, हेतु व सेतु बनती है, जिसके होने से पुरुष के जीवन में सदा उत्सव ही उत्सव रहता है। पुरुष का जीवन नीरस व अर्थहीन ही रहता, यदि महिला न होती।
विडम्बना है कि इस ‘महिला’ रूप ‘उत्सवा’/ हर्षिता के साथ पुरुष का व्यवहार अमानवीय ही रहा।
यह पुरुष जीवन के सुन्दर समतल में पीयूष स्रोत-सी बहती चली आ रही है और पुरुष है कि इस नारों के साथ आत्मीयता का छलावा कर अमानवीय व्यवहार करना अपना धर्म समझता चला आ रहा है।
किन्तु अब चेतना के स्वर बदले हैं और नारी ने अपने अस्तित्व के अर्थ को समझा है। इसने संकल्प लिया है कि इस पुरुष को मानवता का अर्थ समझाना ही है।
मानवता क्या है? यह तो प्रीत का धर्म है, प्रेम का श्रीपुष्प है, आकाश की ज्योत्सना का कान्ति रूप है, भाव है? इस मधुर-फल का रस तो वही जानता है, जो इसका रसास्वादन करता है। नारी ने महिला रूप में सदा पुरुष को मानवता का पाठ पढ़ाया है, किन्तु पुरुष ने कभी गम्भीरता से इसे सीखना ही नहीं चाहा, तो नारी क्या करे ?
अब नारी पुरुष को साधिकार मानवता का अर्थ व मर्म सिखाना चाहती है। नारी ने बहुत सहा है, अब वह पुरुष से सब कुछ पाना चाहती है। उसके सपने, उसकी आकांक्षाएँ, उसका आत्म-सम्मान, उसका आत्म-विश्वास, उसका सुख संसार, एक टुकड़ा धूप, कुछ चन्द्र रामियों का हीरक हार, कुछ मुस्कराहटें, उल्लास, हर्ष आदि-आदि। वह पुरुष को सिखाना चाहती है-” जीवन उत्सव है”, “सहर्ष जीना है”। वह प्रीत के उपहार के रूप में सुख व शान्ति का जीवन चाहती है, कैसे? यही सब कुछ अध्ययन विषय है।
| Weight | 515 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |






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